सोमवार, 22 मार्च 2021

जीन्स तो फिर भी सिल जाएगी फटा दिमाग नहीं

 तीरथ भाई ने जब फटी जीन्स पर  बयान दिया था तब  कई लोगों ने लिखा और कहा कि दिमाग फटा हुआ नहीं होना चाहिए। मुझे लगा था कि कोई बात नहीं , ये मेरी दादी जैसे हैं जिन्हें गलती से  भी  बच्चों का कोई कपड़ा फटा या फिर कपड़े में लटकता धागा दिख जाए तो खुद कैंची लेकर आ जाती और कैंची-सी ही घायल करने वाली वो लताड़ लगातीं कि बच्चा  फिर  कभी  फटे कपड़े पहन उनके सामने नहीं आता। लेकिन वे लताड़ लड़का -लड़की देखकर नहीं लगाती सबको सामान रूप से पड़ती थी । तीरथ जी रावत फिर यहीं नहीं रुके। वे बोल गए तुमको अच्छा चावल ज़्यादा चाहिए था तो काहे को जल गए ज़्यादा बच्चे पैदा क्यों नहीं किये। इस बयानबाज़ी में बेचारे अमेरिका को भी कोस गए। बता गए कि अमेरिका ने भारत को दो सौ साल गुलाम रखा। वाह नए -नए बयानजीवी। गुलाम बनाया अमेरिका ने और आज़ादी फिर हम ब्रिटेन से मांगते रहे।   ये देश के  सबसे बड़े दल ने जो पहले के मुख्यमंत्री को खो किया क्या वह इसलिए कि उनका IQ थोड़ा ज्यादा था। खैर मज़ाक छोड़िये पहले बयान पढ़िए जो उन्होंने कल अंतर्राष्ट्रीय वन्य दिवस पर नैनीताल में दिया था।  यह भाषण पहले फेसबुक पर लाइव किया जा  रहा था जिसे बाद में हटा लिया गया । नए-नए सीएम ने कहा 

" हर घर में पर यूनिट पांच किलो राशन देने का काम किया। जिसके दस थे तो पचास किलो आ गया ,बीस थे तो क्विंटल (सौ  किलो )आ  गया। दो थे तो दस किलो आ गया ,लोगों ने स्टोर बना लिए। खरीदार सामने ढूंढ लिए। इतना बढ़िया चावल आया, कभी अपने आप भी लिया नहीं सामान्य जीवन के लिए। ... कि मुझे दो हैं तो दस किलो मिला बीस वाले को क्विंटल क्यों मिला ? अब इसमें जलन काहे कि जब समय था तो आपने दो ही पैदा किये, बीस क्यों नहीं किये ?"

हंसना मना है क्योंकि सवाल बड़ा है। नेताजी देश की कम आबादी पर चिंता ज़ाहिर कर रहे हैं।बता रहे हैं की  खामखां  ही हम चीन से दूसरे नंबर पर पिछड़े हैं। नेताजी आपके शयन कक्ष में दाखिल हो रहे हैं और आप हैं कि लगातार पिछड़  रहे हैं , जलने-भुनने में लगे हैं। बेवजह आपके अच्छे चावल का नुकसान हो गया। इसे देश का दूसरा नागरिक खा गया, खाता  ही रहा है, खता आपकी है । यह हरा -भरा बयान कुमाऊं से आया है। नैनीताल जहाँ  शेष भारत का मिडिल क्लास  एक बार जाकर बरसों तक उसकी ठंडक और पहाड़ जैसी  खूबसूरती में गुम रहता है। मैं भी। 

बहरहाल एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या इन्हीं बयानों को देने के लिए नया सीएम लाया गया ?  खैर  उत्तराखण्ड के मुखिया तो इसी  उत्तरदाईत्व को निभाने में मुस्तैदी से लग गए हैं। उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया  कि कोरोना महामारी कुम्भ के लिए कोई बाधा नहीं है ,वह तो केंद्र ने दखल दिया, झाड़ लगाई कि इसके पूरे इंतज़ाम किये जाएं। नए सीएम  को समझना होगा कि पार्टी  रात-दिन मेहनत कर बंगाल आसाम एक  कर रही है और वे अजीब -अजीब बयान दिए जा रहे हैं। दस महीने बाद देवभूमि में चुनाव हैं। जीन्स तो फिर भी सिल जाएगी ,फटे दिमाग की सिलाई अभी चिकित्सा विज्ञान के लिए भी मुमकिन नहीं है।


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