मंगलवार, 30 जुलाई 2019

क्या मुंशी प्रेमचंद की कल्पना में होंगे उन्नाव के ऐसे रसूख़दार

महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद का जन्म जिला उन्नाव। उन्नाव मेरे भीतर इसी रूप में अंकित है लेकिन मैं पूरे यकीन से  कह सकती हूँ कि इस ज़िले की बेटी  के साथ जो भयावह अपराध हुआ है, रसूख़दारों के ऐसे जघन्यतम व्यवहार की कल्पना ख़ुद प्रेमचंद ने  भी नहीं होगी। कैसे समाज में तब्दील हो रहे हैं हम ? निर्भया बलात्कार के बाद मर जाती है और उन्नाव की यह बेटी सामूहिक बलात्कार के बाद किसी तरह बच जाती है तो सत्ता और तंत्र उसे अपने पहियों तले रौंद डालने  में  कोई कसर बाक़ी नहीं छोड़ते । यह लड़ाई एक ग़रीब परिवार और ताकतवर की लड़ाई है जिससे हारना मानवता की मौत होगा। तुम ज़िंदा रहना उन्नाव की बेटी। 
अफ़सोस बस गहरे तक अफ़सोस। कुछ ना कर पाने का अफ़सोस।

2 टिप्‍पणियां:

विश्वमोहन ने कहा…

प्रेमचंद का समाज संभवतः संस्कृति की संकरी गलियों में सरक रहा था, 'सभ्यता' की चौड़ी सड़क पर चौकड़ी नही मार रहा था। खेतों की पगडंडियों पर भेड़ चरते थे, घर में 'भेड़िये' कुलाचे नहीं भरते थे। इसलिए तब के उनके इंसानी दिमाग में भला यह हैवानी कल्पना कैसे समाती!
सही प्रश्न उठाती आपकी यह लघु रचना।

varsha ने कहा…

Sach kaha aapne tab ke insani dimag mein yah haivaniyat Bhara plot nahin aa sakta tha.mahan aur sanvedansheel rachnakar Ko unki salgirah par sadar Naman.