शुक्रवार, 21 दिसंबर 2018

जनरल आपसे ऐसी उम्मीद नहीं थी

वाकई हैरानी और दुःख है सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के बयान पर कि फिलहाल वे भारतीय सेना में महिलाओं को लड़ाई में आगे रखने के स्थिति में नहीं है। वे कहते हैं महिलाएं कहेंगी वे हमें देख रहें हैं और फिर हमें उनके लिए आवरण का इंतज़ाम करना पड़ेगा।
माफी चाहेंगे जनरल लेकिन आप उन झाँकने वालों का इंतज़ाम कीजिये , महिलाओं के एतराज़ का नहीं। हो सकता है कुछ व्यावहारिक  परेशानियों हो लड़ाई में लेकिन आप वे शख़्स नहीं होने चाहिए जो ये सब बातें बताएं,आपको यह बताना चाहिए की महिलाएं कैसे  इन चुनौतियों से मुकाबला करें । आपको नए और साहसी तरीकों पर बात करनी चाहिए। आप कैसे पुराने और बने -बनाए ढर्रों पर चलने की बात कर सकते हैं। कौन साठ  साल पहले यह यकीन कर सकता था कि बॉक्सर मैरी कोम ना केवल मर्दों की दुनिया में प्रचलित खेल को अपनाएंगी बल्कि वर्ल्ड चैंपियन भी होंगी। तीन बच्चों की माँ ने साबित किया है कि वह परिवार और प्रोफेशन दोनों मोर्चे बखूबी संभाल सकती हैं। बछिन्द्री पाल का  एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचना भी वैसा ही साहस है। कल्पना चावला का अंतरिक्ष में रहना भी उन लोगों को मुँह तोड़ जवाब है जो स्त्री को केवल बंधी-बंधाई भूमिका में देखना चाहते हैं। स्त्री हर खांचे को तोड़ रही है और यह भी सही है की पहली बार उन्हें यह मौका संजीदा और उन पर यकीन करने वाले ओहदेदार पुरुषों ने ही दिया होगा। जनरल आपसे भी यही उम्मीद थी कि आप नए प्रतिमान गढ़ेंगे। आपके नेतृत्व में स्त्री साहस की उस लकीर पर चलकर भारतीय सेना के फलक पर नई इबारत लिखेगी। लेकिन अफ़सोस।

यूं तो वह 1857 से आज तक अपनी वीरता और साहस के परचम लहरा रही हैं । झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से लेकर जयपुर निवासी पत्रकार  बणा जीतेन्द्र सिंह जी शेखावत की  पुत्री मेजर स्वाति शेखावत "खाचरियावास" तक।  मेजर स्वाति इस समय माइनस 25 डिग्री की सबसे ठंडी व बर्फीली सीमा पर देश की रक्षा में तैनात है। जनरल आप कैसे ऐसा कह सकते हैं ?