Monday, April 23, 2018

स्वरा आप अमेज़न की तरह नहीं डरेंगी

स्वरा भास्कर जी आप कैसे भूल गईं अपनी इंडस्ट्री की रवायत को। यहाँ दिलो-दिमाग साथ रखने की छूट नहीं है। सज-धज कर आओ, काम ख़त्म करो। खूब धन मिलेगा। नए-नए एंडोर्समेंट मिलेंगे। आपको अमेज़न ने ब्रांड कैंपेनर  बनाया था। आपने ट्वीट किया। आप ट्रोल हुईं। कोई बड़ी बात नहीं, बड़ी बात यह है कि कंपनी ने भी उस ट्वीट से खुद को अलग कर लिया।डिलीट कर दिया।  आपका दिमाग़ आपका नुक़सान करा रहा हैस्वरा । बोल के लब सिले हैं तेरे ,बोल के ज़ुबां अब तक तेरी नहीं है। फैज़ साहब से मुआफ़ी के साथ कि अभी कुछ भी तेरा, तेरा नहीं है। आज़ादी ख़ामख़याली है।
अभी कुछ दिन पहले की बात है हैदराबाद में एक एंकर ने यह लिखकर ख़ुदकुशी कर ली थी कि उसका दिमाग उसका सबसे बड़ा दुश्मन है। तेलुगु चैनल की एंकर राधिका रेड्डी  ने यह कदम उस रात नौ बजे का बुलेटिन ख़त्म करने के बाद उठाया। वह ऑटिज़्म से पीड़ित बच्चे  की माँ भी थीं। my brain is my enemy यही लिखा था उन्होंने अपने ख़ुदकुशी नोट में। इससे पहले ज़रूर क्लीवेज के जवाब में दीपिका पादुकोण एक  ताकतवर अख़बार को अपने दिमाग से रूबरू करवा चुकी हैं। 

स्वरा भास्कर  को हम अच्छी एक्ट्रेस बतौर तो जानते ही हैं लेकिन समय -समय पर सामाजिक सरोकारों और मुद्दों पर मुखर होकर बात करने की पहल उन्हें अन्य बॉलीवुड कलाकारों से अलग करती  है और  शायद यही उनके काम को भी अलग धार  देती है। रांझणा ,तनु वेड्स मनु ,निल बटे सन्नाटा और अनारकली ऑफ़ आरा में उनके काम को कौन सराहे बिना रह सकता है। फिल्म्स के अलावा जब स्वरा संजय लीला भंसाली की फिल्म  पद्मावत के बारे में लिखती हैं कि उन्होंने फिल्म देखते हुए ख़ुद को एक वेजाइना में तब्दील होते हुए महसूस किया तो कई लोगों के कानों में यह व्याख्या पिघले सीसे -सी पड़ती है। और अब जब कठुआ में आठ साल की बच्ची के दुष्कर्म और हत्या के ख़िलाफ़ वे तख्ती लेकर खड़ी होती हैं तो भी कई लोगों को खटकती हैं। इसलिए जब वे अमेज़न के कैम्पेन को लेकर ट्वीट करती हैं तो कई लोग उन्हें तो ट्रोल  करते ही हैं ,अमेज़न को भी नहीं बख्शते। उस साइट से सामान नहीं मंगवाने और एप डिलीट करने की धमकी देते हैं। नतीजतन अमेज़न खुद को ट्वीट से अलग कर लेती है।  

ये कहाँ  तक ला दिए गए हैं हम? एक बच्ची के लिए न्याय की मांग को भी धर्म और ध्रुवीकरण के नज़रिये से देखेंगे ? अमेज़न का बहिष्कार और स्वरा  की आवाज़ दबाने की कोशिश किस तरफ धकेल रही है। अमेज़न डरा है क्योंकि वह ऑनलाइन दुकान है लेकिन स्वरा इंसान है वे नहीं डरेंगी।  उनकी ज़ुबां आज़ाद रहेगी। 

ps : और लोगों की तो फितरत ही यही है कि अगर आपने अपना रास्ता चुना है तो वे पहली फुर्सत में यही कहेंगे कि आप ग़लत रास्ते पर हो। 



























  

3 comments:

Kavita Rawat said...

अमेज़न डरा है क्योंकि वह ऑनलाइन दुकान है लेकिन स्वरा इंसान है वे नहीं डरेंगी। उनकी ज़ुबां आज़ाद रहेगी।
.......एकदम सही बात

varsha said...

Thanks kavita ji

शिवम् मिश्रा said...

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, भगवान से शिकायत “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !