बुधवार, 23 नवंबर 2016

धूप पर कोई टैेक्स नहीं लगा है

इमेज क्रेडिट -उपेंद्र शर्मा, अजमेर 

भूल जाइये तमाम रंज ओ गम
मजा लीजिए मौसम का
कि सर्दी की दस्तक पर कोई बंदिश नहीं है
धूप पर कोई टैेक्स नहीं लगा है
धरा ने नहीं उपजी है कोई काली फसल
रेत के धोरे भी बवंडर में नहीं बदले  हैं
पेड़ों ने छाया देने से इंकार नहीं किया है
परिंदों की परवाज में कोई कमी नहीं है
आसमान का चांद अब भी शीतल  है
दुनिया चलाने वाले ने निजाम नहीं बदला है
फिर हम क्यों कागज के पुर्जों में खुद को खाक कर रहे हैं

शुक्र मनाइये कि सब कुछ सलामत है
नदी की रवानी भी बरकरार है
कच्ची फुलवारी भी खिलने को बेकरार है
करारे नोटों का नहीं यह हरेपन का करार है
भूल जा तमाम रंज ओ गम
कि कुदरत अब भी तेरी है
ये बहार अब भी तेरी है
हुक्मरां कोई हो
हुकूमत केवल उसकी है
और बदलते रहना उसकी ताकत
भूल जाइये तमाम रंज ओ गम
मजा लीजिए मौसम का
किसी के काला कह देने से कुछ भी काला नहीं होता
 ... और सफ़ेद कह देने से भी नहीं ।

3 टिप्‍पणियां:

दिलबागसिंह विर्क ने कहा…

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 24.11.2016 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2536 पर दिया जाएगा
धन्यवाद

varsha ने कहा…

shukriya dilbagji

Pammi singh'tripti' ने कहा…

ये बहार अब भी तेरी है..
बहुत बढियाँ..