बुधवार, 13 जनवरी 2016

जयपुर से फुलेरा

हमारी लापरवाही की उधड़ी लेकिन सिस्टम की सिली बखिया दिखाती एक पोस्ट 
एएसआई रामखिलावन मीणा, हेड कांस्टेबल भागूराम और कांस्टेबल शिव सिंह टैब सौपते हुए

नए साल का आगाज जो यकीन से हो तो उम्मीद बंधती है और जो नायकीनी से हो तो? जयपुर रेलवे स्टेशन से चली आशंका अगर फुलेरा पर जाकर निर्मूल साबित होती है तो हालात बेहतर हैं एेसा मानना चाहिए। घटना कुछ यूं है कि चंडीगढ़ से तीन जनवरी की सुबह जयपुर पहुंची गरीब रथ से उतरने के बाद बेटे को याद आया कि हम अपना टैब (मोबाइल और लेपटॉप के बीच का वर्जन) तो ट्रेन की ऊपरी बर्थ पर ब्लैंकेट के नीचे ही भूल आए हैं। लापरवाही हो  चुकी थी] ऑटो स्टेंड से प्लेटफॉर्म पर लौटे तो देखा ट्रेन प्लेटफॉर्म छोड़ अजमेर की ओर सरक चुकी है। तुरंत स्टेशन मास्टर के कार्यालय पहुंचे। ट्रेन की लोकेशन मालूम कर उन्होंने कहा कि आप आरपीएफ (रेलवे पुलिस फोर्स) में जाकर शिकायत लिखा दीजिए। वहां सब इंस्पेक्टर बलराम काजला (यही नाम उनके बैज पर लिखा था) अपने काम में मसरूफ थे। हमें बैठाकर उन्होंने फोन पर कहीं सूचना दी पता लगा गाड़ी करीब डेढ़ घंटे बाद फुलेरा पहुंचेगी तभी कुछ हो सकता है। टैब जिस कवर में था उसके रंग-आकार का पूरा ब्यौरा उन्होंने आरपीए को दे दिया। लगा था कि फुलेरा में अगर पुलिस को मिला तो लौटती ट्रेन से जयपुर भिजवा दिया जाएगा। माफ कीजिएगा आशंका तो यह भी थी कि शायद बीच में ही कहीं गायब ना हो गया हो।
      सुबह आठ से भी पहले का वक्त था यह। पुलिसकर्मी एक-एक कर आते और जय हिंद के साथ काजला जी के रजिस्टर में हाजिरी दस्तखत करते जाते। जब काफी अमला दफ्तर  आ चुका तो उन्होंने एक कांस्टेबल को पुकारा-'कहां थे तुम कल? अपनी बीट छोड़ फिल्म देख रहे थे? अभी रिपोर्ट डालता हूं। 'आप तो अधिकारी हैं कुछ भी कर सकते हैं- सिपाही ने मुुंह खोला। 'अच्छा अधिकारी' .. तो बताओ तुम कहां थे। 'वो साब उन्होंने चाय पीने को बुलाया तो मैं चला गया था।' सिपाही बुदबुदाया। 'मैं तो रिपोर्ट डाल रहा हूं। काजला सख्त थे। तभी बीच बचाव के लिए अन्य सिपाही साथी आए और बोले साहब देख लीजिए। एक मौका दे दीजिए। शायद काजला कुछ नर्म पडे़ थे। इस सबके बीच ट्रेन फुलेरा पहुंच चुकी थी और वहां से अच्छी खबर आ गई थी कि एक टैब ट्रेन में मिला है। काजला ने फोन पर ही कहा ठीक है अगली ट्रेन से उसे जयपुर भिजवा दीजिए। उधर से आवाज आई कि नहीं भिजवाया जा सकता।  सवारी को मय टिकट और पहचान पत्र के फुलेरा आना होगा। एक सिपाही ने तुरंत बताया कि फुलेरा जाने वाली ट्रेन प्लेटफॉर्म पर खड़ी है आप जल्दी निकलिए। फुलेरा जाने के लिए 100 रुपए के दो जनरल टिकट लेकर ज्यों ही प्लेटफॉर्म पर पहुंचे ट्रेन रवाना हो चुकी थी। अब अगली ट्रेन एक घंटे बाद पूजा एक्सप्रेस थी जो पूरे दो घंटे लेट होकर जयपुर पहुंची।
फुलेरा पहुंचे तो आरपीएफ कार्यालय ने सभी दस्तावेजों की फोटो प्रति ली। बरामद वस्तु के बारे में सभी तथ्य क्रॉस चैक किए कि ये हमारा है भी कि नहीं। अब तक बरामद वस्तु के दर्शन नहीं कराए गए थे। एक सादे कागज पर लिखवाया गया कि हमें हमारी वस्तु मिल गई है। हमने मौजूद स्टाफ का नामजद शुक्रिया अदा किया लिखकर। एक तस्वीर ली गई। यह उनकी उपलब्धि बतौर थी और भविष्य में प्रमाण के तौर पर काम आ सकती थी। ज्यों ही टैबलेट हमारे हाथ आया तो यकीन आया कि अभी सिस्टम का पूरी तरह दाह-संस्कार नहीं हुआ है। अच्छा यह भी था कि किशोर होते बेटे का भी भरोसा बना था। एएसआई रामखिलावन मीणा, हेड कांस्टेबल भागूराम और कांस्टेबल शिव सिंह को धन्यवाद देकर हम निकल ही रहे थे कि फुलेरा से जयपुर जाने वाली ट्रेन सामने खड़ी थी। टिकट खिड़की यहां भी स्टेशन से बाहर थी। टिकट लेकर (यहां सत्तर रुपए के दो टिकट) जब तक प्लेटफॉर्म पहुंचे, यह ट्रेन भी रवाना हो गई। खैर, आधे घंटे में ही अगली ट्रेन मिली। जनरल में खडे़-खड़े यात्रा की थकान के बीच भी बड़ी खुशी थी कि खोई वस्तु मिला करती हैं। एक बात महसूस हुई कि सरकार भले ही तकनीक तकनीक कहे,  ये विभाग अब भी पूरी तरह कागज़ों पर ही आश्रित है, तकनीक से बहुत दूर
। काम की शैली भी पुरानी है।  

ps :सोचा था आपसे चंडीगढ़ शहर की नेकी (नेकचंद के बसाए रॉक गार्डन समेत) पर बात होगी लेकिन फिर इसे लिखने से रोक नहीं पाई। सिस्टम को जो हम सब दिन-रात कोसते हैं, वहां कभी उम्मीद को किरण मिल जाए तो उसका जिक्र भी जरूर होना चाहिए।

4 टिप्‍पणियां:

दिलबागसिंह विर्क ने कहा…

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 14 - 01- 2016 को चर्चा मंच पर <a href="http://charchamanch.blogspot.com/2016/01/2221.html> चर्चा - 2221 </a> में दिया जाएगा
धन्यवाद

kirti ने कहा…

पुलिस से रेल्वे तक सब कुछ बदल रहा है, यह अच्छा है पर बदलाव की गति जितनी तेज होगी, इन सब के प्रति हमारी मानसिकता में बदलाव भी कुछ तेजी से होगा....खैर उनके साथ वर्षाजी आप को इसलिए बधाई कि यह सब लिख कर आप ने आमयात्री को भी बदलाव स्वीकार करने पर राजी किया है।

varsha ने कहा…

shukriya dilbaag ji link shamil karne ke liye, kirti ji aapka bhi dhanywad

JEEWANTIPS ने कहा…

सुन्दर व सार्थक रचना प्रस्तुतिकरण के लिए आभार! मकर संक्रान्ति पर्व की शुभकामनाएँ!

मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका स्वागत है...