Thursday, February 13, 2014

प्यार के चार अक्स

खुशियां आती हैं
मेरे पास
तन्हाई के रैपर में
लिपटी हुई

तुम्हें नहीं मालूम
तन्हाई के रैपर में
लिपटी हुई खुशियों के मायने
इसके खुलते ही मैं
समां जाती हूँ इसमें

सारा जुनूं
बस तुम्हारे करीब
रहने का है।
तुम्हारी यादों की
नम मिटटी में बने शामियाने
में शाम गुज़ारने का है। 



2


 ये जो मेरे भीतर भरा है
 तेरे लिए प्रेम
चाहती हूँ
यह ऊष्मा
संचारित हो जाए
किसी जोड़े में
प्यार की सबसे ज़यादा दरकार
ज़िंदा कौमों को है


3
कभी कहा था
तुम बिन
नहीं होगा जीना
फिर, ये कौन जीए जाता है

एक बुत
ताबूत से बना.


4

वह दुनिया का
सबसे लम्बा चुम्बन था
समय के फैर में कौन पड़ता
वह तो गुम थी युगों के लिए.