Sunday, July 7, 2013

सलाम तो सीधे खुदा को जाता है



क्यों करता है वह सलाम
और क्यों ऊंचा हो जाता है मेरा कद
रोज़ मेरे आस-पास ऐसा ही होता
फिर एक दिन अचानक
मेरे ही पाले से आती है एक आवाज़
सलाम हुज़ूर!!
सलाम बजानेवाला चौंक उठता है
ये मेरी आवाज़ में कौन बोला
मेरा सुर इस कंठ
में कैसे गूंजा


 .....तभी से मैं और वह हो लेते हैं
इस आवाज़ के साथ
जो कहता है
मैं कहूं, तुम कहो क्या फर्क पड़ता है
न कहने वाला छोटा
न लेने वाला बड़ा

सलाम तो सीधे खुदा को जाता है .

8 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

फिर भी लोग खुद सलाम करवाना चाहते हैं .... सुंदर रचना

डॉ. मोनिका शर्मा said...

:) बहुत सही बात ....

अरुन शर्मा 'अनन्त' said...

आपकी यह रचना कल मंगलवार (09-07-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

वाणी गीत said...

वाह !

Kailash Sharma said...

बहुत सुन्दर और सटीक प्रस्तुति..

प्रवीण पाण्डेय said...

सच कहा आपने..

Ankur Jain said...

बिल्कुल सही..सच्चे दिल से किया गया सलाम तो सीधे ईश्वर को ही जाता है...

varsha said...

sangitaji monikaji arunji vaniji kailashji praveenji aur ankurji aap sabka shukriya.