Wednesday, March 13, 2013

तुम्हारी मौत पर अफ़सोस है राम सिंह


क्या मजाक  है कि   देश को  दहला देने वाली घटना का  प्रमुख आरोपी ही मौत की  नींद सो गया। हत्या, आत्महत्या वजह चाहे जो हो यह कितना विचित्र है कि वह  जेल में ही मर जाता है। दरअसल 16 दिसंबर की  रात बहादुर लड़की  रोशनी के साथ जो भी हुआ वह भारतीय व्यवस्था की  परत दर परत पोल खोल रहा है। दुष्कर्म के बाद फैंक  दी गई रोशनी और उसके  मित्र की नग्न देह के  पास कोई नहीं ठहरता। पुलिस वाले डेढ़ घंटे तक बहस करते हैं कि  यह मामला जिस थाने के अंतर्गत आता है। ट्रीटमेंट तो देर से मिलता ही है तेरह दिन तक जिंदगी और मौत से जूझ रही रोशनी को  रातोंरात सिंगापुर रैफर कर दिया जाता है। वहां से फिर वह जिंदा नहीं लौटती। अब जब फास्टट्रैक कोर्ट में मामले की सुनवाई चल रही थी कि प्रमुख आरोपी  रामसिंह  के खुदकुशी करने की  खबर फैल गई है। जेल में मारा गया है रामसिंह। सबसे सुरक्षित जेलों में से  एक  तिहाड़ जेल में। कैसा संयोग है कि  देश की पहली महिला आईपीएस किरण बेदी इस जेल की अधीक्षक  भी रह चुकी  हैं और रामसिंह कभी उनके  रिएलिटी शो आपकी  कचहरी में भी तशरीफ ला चुका  है। जहां वह एक  दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हुए अपने हाथ के मुआवजा का दावा करने आया था। किरण बेदी कहती हैं कि  वह परिस्थितियों से समझौता करने वालों में से नहीं था। उसके  पिता का  क़हना है कि  वह मरा नहीं मारा गया है, जेल में उसके साथ दुष्कर्म हुआ था ,उसकी  मां कहती हैं कि उसने तो अपना अपराध पहले ही कुबूल लिया था। हमने भी कह दिया था कि  अगर वह दोषी है तो उसे फांसी होनी चाहिए लेकिन वह खुद को  नहीं मार सक ता। उसके वाकील कि राय में वह हताश नहीं था और उसे अदालत ने स्वयं रिश्तेदारों से मिलने की  भी अनुमति दी थी। रामसिंह की जेल में मौत कतई सामान्य घटना नहीं है। हमारा तंत्र बताता है कि  हम न पीडि़त की  रक्षा करने के योग्य हैं और न आरोपी की । एक वरिष्ठ वकील की बात भी गौर करने लायक  है कि  कई देशों में मीडिया ट्रायल  नहीं होने दिया जाता। आरोपी और पीडि़त दोनों की  पहचान गुप्त रखी जाती है। हमारे यहां हम आरोपी पर आरोप सिद्ध होने से पहले ही उसे बड़ी सजा दे देते हैं। हम उस हक  की  रक्षा ही नही कर पाते जो देश का संविधापन एक नागरिक  को देता है। फिर क्या फायदा लीगल ट्रायल का ? आज हालात यह हैं कि  रोशनी का  परिवार हो या रामसिंह का  दोनों एक  ही कतार में इसलिए खड़े हो गए हैं क्योंकि  अब वे भी एक  फरियादी हैं। उन्हें यह मौका  हमारे सिस्टम की  नाकामी  ने दिया है। देश की  संवेदना को  झकझोर कर रख देने वाली घटना का  खास आरोपी अब जिंदा ही नहीं है।
राम सिंह तुम्हारी सजा पर अफ़सोस नहीं होता लेकिन तुम्हारी इस तरह मौत पर हो रहा है।

6 comments:

Rajendra Kumar said...

ऐसा क्यों लोग सोच रहे हैं की रामसिंह फांसी नही लगा सकता,उससे इतनी हमदर्दी क्यों दिखा रहे हैं लोग,उसका वकील तो कहता है वह निर्दोष था क्या पता क़ानूनी दाव पेंच से उसे छुडा भी लेता.
जो भी हुआ है सही हुआ है.

varsha said...

yah hamdardee nahin hai ...kaisa lagta aapko jab kasab ya fir afzal khud ko jel mein hi fansee kaga lete?

expression said...

रामसिंह का दोनों एक ही कतार में इसलिए खड़े हो गए हैं क्योंकि अब वे भी एक फरियादी हैं।

वाकई...विचलित करने वाली बात है.

अनु

प्रवीण पाण्डेय said...

काश थोड़ा रुक कर हो गया होता..

Anonymous said...

ram sinh jese darinde ki mot par itni hamdardi kyo dikha rahi he ap. beshak use phasi ki saza se sabhi khush hote lekin u uski mot par ap kyo dukh prakat kar rahi he.

प्रदीप कांत said...

विचलित करने वाली बात यह है कि कोई भी कहीं सुरक्षित नहीं है?

यह कैसी व्यवस्था है?