Wednesday, February 20, 2013

इस रात की नीरव चुप्पी में

इस रात की नीरव चुप्पी में
जो मैं तुमको दूं आवाज़
तुम सुन लोगे ?

एक वक़्त था 
तुम्हें जब-जब पुकारा 
तुम मिले 
कई बार तो 
अचानक 
अनायास 
अनजानी जगहों पर भी 

अभी इस चुप्पी में 
मैंने फिर पुकारा है तुम्हारा नाम 
चले आये हैं जाने कितने ख़याल 
यादों की सीढ़ी पकड़कर 
हौले-हौले, 
खामोश प्रेम से भरे 

तुम वाकई कमाल हो 
वक़्त के साथ कभी नहीं बदले तुम।

5 comments:

डॉ. मोनिका शर्मा said...

प्रेम के गहरे भाव ..... हृदयस्पर्शी

प्रवीण पाण्डेय said...

मन की वाणी व्यर्थ न जाये..

Rajendra Kumar said...

बहुत ही भावपूर्ण प्रस्तुति.

Anonymous said...

shabd nahi he is kavita ki tareef ke liye

varsha said...

dr. monika, praveenji, rajendraji aur anaamji aapka bahut shukriya.