Tuesday, October 30, 2012

बेवा तारीख़



एक डूबी तन्हा तारीख है आज
कभी महकते थे फूल इस दिन
चिराग भी होते थे रोशन यहाँ
खुशबू भी डेरा डाले रहती थी

तुम नहीं समझोगे 
तारीख का डूबना क्या होता है
नज़रों के सामने ही यह
ऐसे ख़ुदकुशी करती  है
  कोई हाथ भी नहीं दे पाता
हैरां हूँ एक मुकम्मल तारीख
यूं ओंधे मुंह पड़ी है मेरे सामने
खामोश और तन्हा.

मैंने देखा है एक जोड़ीदार तारीख को बेवा होते

फिर भी मैं उदास नहीं मेरे यार
न ही नमी है आँखों में
इसी तारीख में जागते हैं
बेसबब इरादे
बेसुध लम्हें
बेहिसाब बोसे
बेखुद साँसें
बेशुमार नेमतों से घिरी है यह तारीख...

Thursday, October 18, 2012

वहां तालिबान, यहाँ बयान

brave girl: ham sab malala hain

पडोसी मुल्क में जहाँ पढना चाहने वाली किशोरी मलाला पर गोली दागी जा रही वहीँ हमारे मुल्क बयानों के बाण गहरे घाव कर रहे हैं.
न शब्दों को लिखते हुए स्वर प्रार्थना में डूबे हुए हैं। पंद्रह साल की मलाला
युसुफजई के लिए इसके सिवाय किया भी क्या जा सकता है। महज
स्कूल जाते रहने की जिद एक बच्ची को मौत देने का कारण कैसे बन
सकती है। नौ अक्टूबर को मलाला के सर में उस वक्त गोली मारी गई जब
वह परीक्षा देकर बस से घर लौट रही थी। दो अज्ञात व्यक्ति नकाब ओढे़ बस
में चढ़े और पूछा कि तुममें से मलाला कौन है। मलाला के गोली लगते ही
बस के फर्श पर खून फैल गया। हमले में उसकी दो सहेलियां भी घायल हो
गईं। शाजिया को गोली उसके कंधे पर लगी। इस दर्दनाक मंजर की दास्तान
दोहराते हुए मलाला की दोस्त शाजिया की  में कोई खौफ नहीं
तैरता। वह कहती है, मलाला ठीक हो जाएगी और हम फिर स्कूल जाएंगे।
मलाला को पता था कि उसके साथ यह हादसा हो सकता है। उसे लगातार
धमकियां भी मिल रही थीं, लेकिन एक दिन भी वह स्कूल जाने से नहीं कतराई।

पाकिस्तान की स्वात घाटी बेहद खूबसूरत है, लेकिन गोरे, सुर्ख चेहरे
तालिबानियों से आतंकित हैं। तालिबान का मानना है कि मुसलमान लड़कियों की जगह स्कूल में नहीं, घर में है। उन्होंने उनके स्कूल जाने पर पाबंदी लगा दी है। मलाला वह लड़की है जिसने पढ़ाई को अपना हक मानते
हुए तालिबानियों का विरोध किया। पिता जियाउद्दीन कवि और स्कूल संचालक हैं। मलाला ने ग्यारह साल की उम्र में बीबीसी की उर्दू सेवा के लिए गुल मकई नाम से डायरी लिखी। पांच जनवरी,2009 को वह लिखती है
मैं स्कूल के लिए तैयार हो रही थी और वर्दी पहनने ही वाली थी कि मुझे याद आया कि प्रिंसिपल ने हमसे स्कूल की वर्दी नहीं पहनने के लिए कहा है। उन्होंने कहा है कि हमें सादे कपड़ों में स्कूल आना होगा, इसलिए
मैंने अपनी पसंदीदा गुलाबी रंग की पोशाक पहनी है। मेरी सहेली ने मुझसे पूछा, खुदा  के लिए सच-सच बताओ कि क्या  हमारे स्कूल पर तालिबान हमला करेगा? सुबह असेंबली में हमसे कहा गया था कि हम रंग-बिरंगे परिधान न पहने क्योंकि तालिबान को इस पर आपत्ति होगी।

सात जनवरी को मलाला ने लिखा मैं मोहर्रम की छुट्टियों के लिए बुनैयर आई हूं। यहां के पहाड़ और हरे-भरे खेत बहुत पसंद हैं। मेरी  स्वात घाटी भी बेहद खूबसूरत है लेकिन वहां शांति नहीं है। चौदह जनवरी को
लिखा, स्कूल जाते समय मेरा मूड बिलकुल अच्छा न था क्योंकि कल से सर्दी की छुट्टियां शुरू हो
रही हैं। प्रिंसिपल ने छुट्टियों की तो घोषणा कर दी लेकिन ये नहीं बताया कि स्कूल दोबारा कब क्लेगा।
तालिबान ने पन्द्रह जनवरी से लड़कियों की पढ़ाई पर प्रतिबंध की घोषणा की है। पन्द्रह जनवरी को उन्होंने लिखा कि रातभर तोप की गोलीबारी का शोर होता रहा। आजमैंने अखबार में बीबीसी उर्दू के लिए लिखी गई अपनी डायरी पढ़ी। मेरी मां को मेरा उपनाम गुल मकई पसंद आया और उन्होंने मेरे पिता से कहा,
क्यों न हम इसका नाम बदलकर गुलमकई रख दें। मुझे  भी  ये नाम अच्छा लगा क्योंकि मलाला का मतलब है शौक में डूबा हुआ इनसान।

इसी मलाला को मार डालने के इरादे से उस पर हमला किया गया।
इलाज के लिए उसे इंग्लॅण्ड भेज दिया गया है और पीछे पूरा देश उसकी
सलामती की दुआ कर रहा है। वाकई मलाला के साहस को सौ-सौ सलाम है कि इतनी
सी उम्र में इस लड़की में इतना हौसला समा गया है। इतना कि दुश्मनों की धमकी, गोली सब बेअसर। एक
बच्ची के इरादे कट्टरपंथी तालिबान को इस कदर हिला देते हैं कि वह बंदूक उठाकर मार डालना चाहते
हैं। कलम थामने की चाहत जान की कीमत पर पूरी होती है। पाकिस्तान की पत्रकार सोनिया
फतह लिखती हैं कि मलाला पर हमले ने हर आंख को नम कर दिया है। जाहिर है कि
विचार बुलैटप्रूफ होते हैं। आप कितने ही लोगों को मार दें, उड़ा दें, काट दें विचारों का कुछ भी नहीं
बिगडेग़ा। संभव है की मलाला पर इस हमले के बाद कनफ्यूज  पाकिस्तानी इस दुविधा से उबरेंगे की उन्हें किस दिशा में जाना है .यूं देखा जाए तो भारत में भी हालात बेहतर नहीं हैं। बेटियों के लिए जो बयान हैं वे किसी गोली से कम नहीं। लड़की की शादी सोलह में कर दो,गोत्र में ब्याह  करने वालों के
खिलाफ कानून बना दो, नब्बे  फीसदी लड़कियां स्वेच्छा से दुष्कर्म कराती हैं। किस दौर में जी रहे हैं हम?  इन
जिम्मेदार  लोगों की जुबां पर कैसे तालिबान सवार हो गए हैं ?

Thursday, October 4, 2012

पुष्कर के फूल

कुदरत की गोद में बसा पुष्कर प्रथ्विवासियों के लिए बेहतरीन उपहार है
लेकिन यहाँ  के कथित पुजारी इस सौंदर्य को नष्ट कर रहे हैं वह भी एक फूल देकर .
आप सोच रहे होंगे की फूल ने कभी किसी का  क्या बिगाड़ा है लेकिन ये फूल इन दिनों सैलानियों को डराने का काम कर रहे हैं

  
ब्रह्मा जी के एकमात्र प्राचीन मंदिर के अलावा पुष्कर में कुछ ऐसा है
जो आध्यात्मिक स्तर पर इनसान को बांधने की क्षमता रखता है। पहाड़ों की आभा, मंदिर के घंटों का नाद और घाट पर आस्था में डूबे लोग। यहां हरेक के लिए कुछ न कुछ है। लेकिन कुछ
ऐसा भी है जो तकलीफ देता है। ब्रह्मा जी के मंदिर से घाट तक जाते हुए एक सैलानी जोड़ा भी हमारे साथ
हो लिया। शायद उन्हें लगा था कि हमारे साथ रहते हुए वे धार्मिक
आस्था को ठेस पहुंचाए बिना दर्शन कर सकते हैं। वे हर बार हमसे पूछते
कि  क्या  हम  भीतर जा सकते हैं, क्या यहां जूते उतारने होंगे,   यहां
झुककर प्रणाम करना होगा।  तमाम जिज्ञासाएं वे हमारे साथ साझा करते हुए चल रहे थे । वे स्पेन
से आए थे। बार्सिलोना से। हमने स्पेन की राजधानी का नाम लिया,
मेड्रिड। तब दोनों ने हमें टोकते हुए कहा मद्रीद, हम इसे मद्रीद उच्चारित
करते हैं। हमारे परिवार के एक बच्चे ने उनसे ओला कहा तो वे बहुत  खुश
हुए। स्पेनिश  भाषा में ओला के मायने हैलो है। उन्होंने आगे बताया कि बाय
को एडिओस कहते हैं जिसका अर्थ है ईश्वर के हवाले। कुछ-कुछ  खुदा हाफिज की तरह।

पुष्कर घाट  मोटर के पानी से भर रहा था। मूंह धोना मुश्किल जान पड़ता था . वहां बैठे चंद पल ही गुजरे थे कि सफेद कपड़ों में फूलों की थाली लिए एक व्यक्ति उनके पास आया। उसने उनकी हथेली में लाल फूल
रखकर कहा कि अगर आपको अपने परिजनों और दोस्तों के लिए पूजा
करवानी है तो हम आपकी मदद करेंगे। बस सौ यूरो (यूरोपीय मुद्रा) देने
होंगे। उनके हाथ जोड़कर मना करने के बावजूद वह जोर देकर पूजा की बात करने लगा। वे दोनों उससे
अलग जाकर खडे़ हो गए। अभी वे वहां पहुंचे ही होंगे कि एक और व्यक्ति उनके
पास आकर कहने लगा- आप कल कुछ दान की बात कर रहे थे। मैं आपको सही तरीका बताता हूं।
जोड़ा हैरत में था। हमने निवेदन किया कि आप  यों इन्हें परेशान कर रहे हैं जब इन्हें पूजा नहीं
करवानी तो  क्यों  जोर दे रहे हैं। ये हमारे मेहमान हैं आपका यूं दबाव डालना अच्छा नहीं। ऐसा कहते ही कथित पुजारी गुस्से में चीखा-'अच्छा हम दबाव डाल रहे हैं। एक फूल ही तो दिया है इन्हें,  क्या अपराध कर दिया। कैसे भरें हम ब्राह्मण अपने बच्चों का पेट। हमारे बीवी-बच्चे भूखें मर जाएं। मैं एमए पास हूं। कोई नौकरी नहीं मिली मुझे। नोकरियां तो सारी छीन ली हमसे। कैसे करें हम गुजारा...।
.....तो  क्या आप इन्हें जबरिया पूजा के लिए कहेंगे। ये  क्या छवि लेकर जाएंगे हमारे देश की। थोड़ा पैसा आपको जरूर मिल जाएगा लेकिन आप देश की छवि धूमिल कर रहे हैं।
इस तल्ख़ वार्तालाप के चलते माहौल कुछ गर्म हो चला था। वह स्पेनिश जोड़ा थैंक यू-थैंक  यू कहता हुआ हमारा आभार प्रकट किए जा रहा था। जबकि इसकी कोई जरूरत नहीं थी। वे हमारे सम्मानित अतिथि थे। दरअसल, आस्था और आध्यात्म के बीच पुष्कर की यह भी  एक परंपरा हो गई है। कई तो डराकर उन्हें बद्दुआएं देने लगते हैं कि आपको सांप डस लेगा। पूजा के नाम पर धन ऐंठने का यह कारोबार निर्बाध जारी है जिसके जैसा समझ में आता है सैलानी की जेब खाली करवाता है। कई लोग इस सच से वाकिफ हैं लेकिन देश और पर्यटन की छवि दागदार कर रही इन हरकतों पर कोई सख्ती नहीं है।  पर्यटन की पहली ज़रुरत है  कि सैलानी निःसंकोच और निर्भय होकर घूम-फिर सकें, हैरत होती है कि यही हम अब तक नहीं दे पाए हैं. कैसे पधारेगा पाहुणा हमारे देश??