मंगलवार, 30 अक्तूबर 2012

बेवा तारीख़



एक डूबी तन्हा तारीख है आज
कभी महकते थे फूल इस दिन
चिराग भी होते थे रोशन यहाँ
खुशबू भी डेरा डाले रहती थी

तुम नहीं समझोगे 
तारीख का डूबना क्या होता है
नज़रों के सामने ही यह
ऐसे ख़ुदकुशी करती  है
  कोई हाथ भी नहीं दे पाता
हैरां हूँ एक मुकम्मल तारीख
यूं ओंधे मुंह पड़ी है मेरे सामने
खामोश और तन्हा.

मैंने देखा है एक जोड़ीदार तारीख को बेवा होते

फिर भी मैं उदास नहीं मेरे यार
न ही नमी है आँखों में
इसी तारीख में जागते हैं
बेसबब इरादे
बेसुध लम्हें
बेहिसाब बोसे
बेखुद साँसें
बेशुमार नेमतों से घिरी है यह तारीख...

7 टिप्‍पणियां:

मेरा मन पंछी सा ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन
भावमयी अभिव्यक्ति...

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत भावपूर्ण ..

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

स्मृतियाँ शक्ति भी दें...

Smart Indian ने कहा…

:(

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

हृदयस्पर्शी

के सी ने कहा…

aapko padh kar lajavab...

kabhii kabhii itan dhundhali ho jati haiN tasvireN
pata nahiN chalata qadamoN meN kitani haiN zanjireN
paNv baNdhe hote haiN lekin chalanaa padata hai. [Zafar Gorakhpuri]

varsha ने कहा…

reenaji sangita ji, praveenji,anuraagji, monika ji aur kishoreji aapki raay mayne rakhti hai mere liye shukriya.