Thursday, October 4, 2012

पुष्कर के फूल

कुदरत की गोद में बसा पुष्कर प्रथ्विवासियों के लिए बेहतरीन उपहार है
लेकिन यहाँ  के कथित पुजारी इस सौंदर्य को नष्ट कर रहे हैं वह भी एक फूल देकर .
आप सोच रहे होंगे की फूल ने कभी किसी का  क्या बिगाड़ा है लेकिन ये फूल इन दिनों सैलानियों को डराने का काम कर रहे हैं

  
ब्रह्मा जी के एकमात्र प्राचीन मंदिर के अलावा पुष्कर में कुछ ऐसा है
जो आध्यात्मिक स्तर पर इनसान को बांधने की क्षमता रखता है। पहाड़ों की आभा, मंदिर के घंटों का नाद और घाट पर आस्था में डूबे लोग। यहां हरेक के लिए कुछ न कुछ है। लेकिन कुछ
ऐसा भी है जो तकलीफ देता है। ब्रह्मा जी के मंदिर से घाट तक जाते हुए एक सैलानी जोड़ा भी हमारे साथ
हो लिया। शायद उन्हें लगा था कि हमारे साथ रहते हुए वे धार्मिक
आस्था को ठेस पहुंचाए बिना दर्शन कर सकते हैं। वे हर बार हमसे पूछते
कि  क्या  हम  भीतर जा सकते हैं, क्या यहां जूते उतारने होंगे,   यहां
झुककर प्रणाम करना होगा।  तमाम जिज्ञासाएं वे हमारे साथ साझा करते हुए चल रहे थे । वे स्पेन
से आए थे। बार्सिलोना से। हमने स्पेन की राजधानी का नाम लिया,
मेड्रिड। तब दोनों ने हमें टोकते हुए कहा मद्रीद, हम इसे मद्रीद उच्चारित
करते हैं। हमारे परिवार के एक बच्चे ने उनसे ओला कहा तो वे बहुत  खुश
हुए। स्पेनिश  भाषा में ओला के मायने हैलो है। उन्होंने आगे बताया कि बाय
को एडिओस कहते हैं जिसका अर्थ है ईश्वर के हवाले। कुछ-कुछ  खुदा हाफिज की तरह।

पुष्कर घाट  मोटर के पानी से भर रहा था। मूंह धोना मुश्किल जान पड़ता था . वहां बैठे चंद पल ही गुजरे थे कि सफेद कपड़ों में फूलों की थाली लिए एक व्यक्ति उनके पास आया। उसने उनकी हथेली में लाल फूल
रखकर कहा कि अगर आपको अपने परिजनों और दोस्तों के लिए पूजा
करवानी है तो हम आपकी मदद करेंगे। बस सौ यूरो (यूरोपीय मुद्रा) देने
होंगे। उनके हाथ जोड़कर मना करने के बावजूद वह जोर देकर पूजा की बात करने लगा। वे दोनों उससे
अलग जाकर खडे़ हो गए। अभी वे वहां पहुंचे ही होंगे कि एक और व्यक्ति उनके
पास आकर कहने लगा- आप कल कुछ दान की बात कर रहे थे। मैं आपको सही तरीका बताता हूं।
जोड़ा हैरत में था। हमने निवेदन किया कि आप  यों इन्हें परेशान कर रहे हैं जब इन्हें पूजा नहीं
करवानी तो  क्यों  जोर दे रहे हैं। ये हमारे मेहमान हैं आपका यूं दबाव डालना अच्छा नहीं। ऐसा कहते ही कथित पुजारी गुस्से में चीखा-'अच्छा हम दबाव डाल रहे हैं। एक फूल ही तो दिया है इन्हें,  क्या अपराध कर दिया। कैसे भरें हम ब्राह्मण अपने बच्चों का पेट। हमारे बीवी-बच्चे भूखें मर जाएं। मैं एमए पास हूं। कोई नौकरी नहीं मिली मुझे। नोकरियां तो सारी छीन ली हमसे। कैसे करें हम गुजारा...।
.....तो  क्या आप इन्हें जबरिया पूजा के लिए कहेंगे। ये  क्या छवि लेकर जाएंगे हमारे देश की। थोड़ा पैसा आपको जरूर मिल जाएगा लेकिन आप देश की छवि धूमिल कर रहे हैं।
इस तल्ख़ वार्तालाप के चलते माहौल कुछ गर्म हो चला था। वह स्पेनिश जोड़ा थैंक यू-थैंक  यू कहता हुआ हमारा आभार प्रकट किए जा रहा था। जबकि इसकी कोई जरूरत नहीं थी। वे हमारे सम्मानित अतिथि थे। दरअसल, आस्था और आध्यात्म के बीच पुष्कर की यह भी  एक परंपरा हो गई है। कई तो डराकर उन्हें बद्दुआएं देने लगते हैं कि आपको सांप डस लेगा। पूजा के नाम पर धन ऐंठने का यह कारोबार निर्बाध जारी है जिसके जैसा समझ में आता है सैलानी की जेब खाली करवाता है। कई लोग इस सच से वाकिफ हैं लेकिन देश और पर्यटन की छवि दागदार कर रही इन हरकतों पर कोई सख्ती नहीं है।  पर्यटन की पहली ज़रुरत है  कि सैलानी निःसंकोच और निर्भय होकर घूम-फिर सकें, हैरत होती है कि यही हम अब तक नहीं दे पाए हैं. कैसे पधारेगा पाहुणा हमारे देश??

11 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

काश ये संयत हो संस्कृति को सही रूप में प्रस्तुत करें।

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

कैसे पधारेगा पाहुणा हमारे देश??

जी हाँ पूरे देश की छवि बिगाड़ता है हमारे लोगों का ऐसा व्यवहार ....

awale said...

IN LOGO KI MANSIKTA HI EASI HO GAI HAI HAR KISI KE GALE PAD JATE HAI KUCH SAMAZDAR LOGO NE INKI WAJAH SE WAHA JANA KAM KAR DIYA HAI

jai said...

ji main bhi ek baar pushkar gaya hun aur aisi prastithi say guzar chuka hun jitni gandgi wahan dekhi maine kahin aur nahin dekhi-sarovar ka pani itna ganda tha ki ouccho mat--pande nahin daku mile wahan--prashashan ko kuch skht kadan udhne chahiye-aur saath hi wahan kay logon ko bhi iskay virudh awaz udhani chahiye

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

कल 13/10/2012 को आपकी यह खूबसूरत पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सार्थक लेख .... देश की छवि को बनाए रखना चाहिए ।

भावना said...

har teert sthan ka yahi haal hai,haridwar me to pande to ...kya likhoon ,bhikaree bhi aapke peeche aise chipk jaate hain ki kai baar chhina jhapti ho jaati hai:(

आशा जोगळेकर said...

केवल तीर्थ ही नही हर ऐतिहासिक स्थल हर बाज़ार में इन सैलानियों को ऐसी ही परेसानियां झेलनी पडती है । कोई कानून बन जाये इसके खिलाफ...........और उसका सख्ती से पालन हो.......

Madan Mohan Saxena said...

बहुत अद्भुत अहसास...सुन्दर प्रस्तुति .पोस्ट दिल को छू गयी.......कितने खुबसूरत जज्बात डाल दिए हैं आपने..........बहुत खूब,बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

varsha said...

praveenji dr. monika,awleji, jaiji,yaswantji ,sangeeta ji,bhawnaji ashaji ,nadanmohanji aap sabka shukriya ,wakayee in tirth sthalon ka loot sthalon mein badaina vitrashna paida karta hai.

varsha said...

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