शफ्फाफ़ रंगतवाली एक लड़की
हरी आँखों से हैरत टपकाए पूछती है
वाकई , उन्होंने आपसे कहा था
जीवन के किसी भी मोड़ पर
तुम्हें लगे कि बस, अब इस रिश्ते से
बहार जा चुकी है और तुम्हें
बाहर आना है
मैं एक पल भी नहीं लगाऊंगा अलग होने में ?
हाँ, कहा था
रिश्तों की जम्हूरियत पर
जब हरियाली पनपती है
ये ज़मीं जन्नत मालूम होती है
...और मैंने जी है वो जन्नत
जीते जी
तुम उम्मीद कायम रखो लड़की.
हरी आँखों से हैरत टपकाए पूछती है
वाकई , उन्होंने आपसे कहा था
जीवन के किसी भी मोड़ पर
तुम्हें लगे कि बस, अब इस रिश्ते से
बहार जा चुकी है और तुम्हें
बाहर आना है
मैं एक पल भी नहीं लगाऊंगा अलग होने में ?
हाँ, कहा था
रिश्तों की जम्हूरियत पर
जब हरियाली पनपती है
ये ज़मीं जन्नत मालूम होती है
...और मैंने जी है वो जन्नत
जीते जी
तुम उम्मीद कायम रखो लड़की.

13 comments:
हाँ, कहा था
रिश्तों की जम्हूरियत पर
जब हरियाली पनपती है
सुन्दर व सटीक पंक्तियाँ
सादर
वाह....
एहसासों को महसूस किया जा सकता है इन पंक्तियों में...
सुन्दर!!!!
अनु
सजीव लगे आपके शब्दों में ढले भाव ....
कल 19/08/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!
बहुत ही गहरे भावो की अभिवयक्ति......
sundar , bhaavpoorn rachanaa , badhayi
कोमल अहसासों की अभिव्यक्ति.....
सुन्दर...
:-)
भावपूर्ण, सुंदर रचना...
रिश्तों की आस में टिकी, जीवन की श्वाँस..
oh..khoobsurat
sahi shabd he shaffaf na ki shaffak. baki kavita bhavpurn he.rishto ki bunavat ki bareek turpai he ye.
जीवित संवाद "मैं एक पल भी नहीं लगाऊंगा अलग होने में"
aap sabka bahut aabhaar.
Post a Comment