Friday, August 17, 2012

हरी आँखोंवाली लड़की

शफ्फाफ़  रंगतवाली एक लड़की
हरी आँखों से हैरत टपकाए पूछती है
वाकई , उन्होंने आपसे कहा था
जीवन के किसी भी मोड़ पर
तुम्हें लगे कि बस, अब इस रिश्ते से
बहार जा चुकी है और तुम्हें
बाहर आना है
मैं एक पल भी नहीं लगाऊंगा अलग होने में ?

हाँ, कहा था
रिश्तों की जम्हूरियत पर
जब हरियाली पनपती है
 ये ज़मीं जन्नत  मालूम होती है
...और मैंने जी है वो जन्नत
जीते जी

 तुम उम्मीद कायम रखो लड़की.

13 comments:

yashoda agrawal said...

हाँ, कहा था
रिश्तों की जम्हूरियत पर
जब हरियाली पनपती है
सुन्दर व सटीक पंक्तियाँ
सादर

expression said...

वाह....
एहसासों को महसूस किया जा सकता है इन पंक्तियों में...
सुन्दर!!!!

अनु

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

सजीव लगे आपके शब्दों में ढले भाव ....

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

कल 19/08/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

sushma 'आहुति' said...

बहुत ही गहरे भावो की अभिवयक्ति......

अजय कुमार said...

sundar , bhaavpoorn rachanaa , badhayi

Reena Maurya said...

कोमल अहसासों की अभिव्यक्ति.....
सुन्दर...
:-)

Ankur jain said...

भावपूर्ण, सुंदर रचना...

प्रवीण पाण्डेय said...

रिश्तों की आस में टिकी, जीवन की श्वाँस..

Vidhu said...

oh..khoobsurat

Anonymous said...

sahi shabd he shaffaf na ki shaffak. baki kavita bhavpurn he.rishto ki bunavat ki bareek turpai he ye.

Bharat Tiwari said...

जीवित संवाद "मैं एक पल भी नहीं लगाऊंगा अलग होने में"

varsha said...

aap sabka bahut aabhaar.