Thursday, July 26, 2012

रंग ए उल्फ़त

सोच रही हूँ मेरे तुम्हारे बीच
कौन सा रंग है
स्लेटी, इसी रंग की तो थी कमीज़
जो  पहली  बार तुम्हें
तोहफे में दी थी
तुमने उसे पहना ज़रूर
पसंद नहीं किया .
लाल, जब पंडित ने कहा था
लड़की से कहना यही रंग पहने...
हम दोनों
को रास नहीं आया ख़ास
पीला, तुम्हारे उजले रंग में खो-सा जाता था 

गुलाबी,  में तुम्हे छुई-मुई लगती
तुम ऐसे नहीं देखना चाहते थे मुझे
सफ़ेद, में तुम फ़रिश्ता नज़र आते
यह लिखते हुए एक पानी से भरा बादल घिर आया है
हरा और केसरिया
इन पर तो जाने किन का कब्ज़ा हो गया है
नीला
यही,यही तो था
जिस पर मेरी तुम्हारी युति थी
नीले पर कोई शक शुबहा नहीं था हमें
फ़िदा थे हम दिलों जान से .

अब ये सारे रंग मिलकर काला
बुन देते हैं मेरे आस-पास.
मैं हूँ कि वही इन्द्रधनुष बनाने पर तुली हूँ
 जो था हमारे
आस-पास
नीलम आभा के साथ  |

8 comments:

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

आँखें नम हुयीं पढ़कर ....

प्रवीण पाण्डेय said...

यादों का इन्द्रधनुष, बहुत ही कोमल...

प्रदीप कांत said...

यादों का यह इन्द्रधनुष कोमल ज़रूर लगता है किंतु कचोटता है क्यों कि

हरा और केसरिया
इन पर तो जाने किन का कब्ज़ा हो गया है

- और रंगों पर इस तरह किसी का क़ब्ज़ा सबसे खतरनाक है।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

जीवन के कितने रंग!

Soma Pradhan said...
This comment has been removed by the author.
Soma Pradhan said...

Beautiful and Heart Touching

Anonymous said...

tum ne kaha tha pahli barish k padhte hi laut aaoge
hum aur tum milkar bheegan ge
dekho jana
kitni phuharen beet
chuki hen
sawan phir se laut k aaya he
barson pahle kiya tha
tum ne mujh se ahad
nibha jao na
jaan laut ki aajao na
ab laut ke aajao na

varsha said...

dr. monika, praveenji, pradeepji,
anuraagji aur soma aap sabka shukriya.