मंगलवार, 24 जुलाई 2012

यूं ही दो ख़याल

प्रेम 
तुम थे तो थी
 जिद 
तकरार 
अनबन 
उलझन 
केवल तब ही था 
संगीत 
सृजन
हरापन 

...और बस तब ही 
तब ही तो हुआ था मुझे प्रेम |


हिचकी नहीं सिसकी 

अरसा हुआ

कोई हिचकी नहीं आई उसे 
जुबां भी नहीं दबी 

दाँतों के नीचे

बस, याद.... 


शायद,

हिचकी अब 

सिसकी हो गयी है |


6 टिप्‍पणियां:

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

थोड़े उदास हैं ये ख्याल ....

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

छोटी छोटी बातों की स्मृति बहुत बड़ी होती है..

समयचक्र ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति ...

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

मन के भावों को खूबसूरती से लिखा है

वाणी गीत ने कहा…

तकरार , अनबन में भी हुआ था प्रेम और अब हिचकी का सिसकी बन जाना !
उदासियों में /पर भी अच्छा लिखा !

बेनामी ने कहा…

dono kavitao me chalees petalis shbdo ne hazaro lakho shbdo ki vyatha ko ujagar kiya he.apki punji he ye shabd yahi thode se shbd.inhe kifayt se kharch kijiyega. varna zaroorat padhne par apko shabd nahimilege.