मंगलवार, 31 जनवरी 2012

कुछ असर रसोई के मुताल्लिक




प्याज 
जाने क्या है 
 तुम और नमीं 
कदम-ताल मिला कर ही आते हो
और आज तो दस्तक भी शामिल हो गयी थी
अधकटे  प्याज के साथ खोल दिया दरवाज़ा
एक बार फिर मैंने
छिपा लिया था तुम्हें
और तुम्हारे लिए अपने जज़्बात .

***

 
मटर  
मैं मान के चलती थी
गर  मटर छीलने  में 
 
 तुम्हारी मदद ली
तो बन चुकी सब्जी
मटर, कटोरदान
से कम
तुम्हारे होठों से ज्यादा
टकराते थे ,

अब कटोरदान मटर से लबरेज़ है
तुम नहीं आओगे मेरी मदद को ?


***
 
मैथी
वही मैथी 
पकने पर खुशबू भी वही
फिर उसके सब्ज़ में
ये कौन से रंग
 घुल आये हैं 
एक तो जाना-पहचाना
तुम्हारी पसंद का है
दूसरा मेरी वीरानी का है
शायद
रिश्ता बन रहा है उससे भी
लेकिन अब मैथी
नहीं
बनती उस घर में कभी ||


***

18 टिप्‍पणियां:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

सब्जियां और यादें नमकीन सी ...

cartoonist ABHISHEK ने कहा…

वर्षा,
मुझे कविता की कोई बहुत
ज्यादा समझ तो नहीं है
मगर फिर भी
तुम्हारी सबसे अच्छी कविताओं में ,
मैं इन्हें शुमार करता हूँ ....
अच्छी कविता ....
बधाई

सदा ने कहा…

बहुत बढि़या

शिवम् मिश्रा ने कहा…

वाह क्या बात है ... बहुत खूब ... यादो का क्या है ... किसी भी चीज़ से जुडी हुयी हो सकती है !

फ़िरदौस ख़ान ने कहा…

ग़ज़ब है...
सब्ज़ियों पर रचनाएं...क्या बात है...
अच्छा लगा पढ़कर...
हम ब्लॉग नियमित रूप से पढ़ते हैं...लेकिन कमेंट नहीं कर पाते...
आप मसरूफ़ियत समझ सकती हैं...

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सब्जियों को स्मृति का आधार बनते देख कर रोचक लगा।

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

अब कटोरदान मटर से लबरेज़ है
तुम नहीं आओगे मेरी मदद को ?

कुछ अलग सी कविता .....सभी पंक्तियाँ मन में उतरती सी ....अपनी सी..पर उदास

शिवम् मिश्रा ने कहा…

इस पोस्ट के लिए आपका बहुत बहुत आभार - आपकी पोस्ट को शामिल किया गया है 'ब्लॉग बुलेटिन' पर - पधारें - और डालें एक नज़र - थिस इज़ बेटर देन ओरिजिनल जी... - ब्लॉग बुलेटिन

Archana Chaoji ने कहा…

आज इन कविताओं से खुद की खबर आई है...

संजय भास्‍कर ने कहा…

बहुत खूब, लाजबाब !

arun aditya ने कहा…

स्मृति मन की पूंजी है और कविता की भी।
पर महत्वपूर्ण बात यह है कि स्मृति के कृति में ढल जाने के लिए जो शिल्प कौशल चाहिए उसे भी आपने काफी हद तक अर्जित कर लिया है।
बधाई!

Ek ziddi dhun ने कहा…

दिलचस्प हैं ये सब्जियों और स्मृतियों के रंग

Pratibha Katiyar ने कहा…

कुछ भी नहीं कह पा रही हूँ वर्षा जी बस गले लग जाना चाहती हूँ आपके...बाहें पसारिये..

varsha ने कहा…

rashmiji abhishekji sada, shivam mishraji,firdausji,praveenji, dr monika, archanaji, sanjayji,arunji dheereshji bahut shukriya aur bahen pasar di hain pratibhaji.

Aadii ने कहा…

वाह वाह वाह !

Unknown ने कहा…

अत्यंन्त रोचक,नयापंलिये हुए भावपूर्ण कवितायें अंतस को गहराई तक छू गयीं
बेहतरीन प्रस्तुति :) (Y)

kavita verma ने कहा…

behtreen kavitaye bhavuuk yadon ke sath ...

आर्यन शर्मा 'अंश' ने कहा…


बहुत खूब...लाजवाब!