Wednesday, November 16, 2011

ऐसे ही मौकों पर पत्नी अपना पर्दा पति पर डालती है

bhanvari devi : no body reveals where is she
leela maderna :chair person apex bank
mahipal maderna : former minister rajasthan
  
पत्नी में वह कौनसा माद्दा होता है जिसके चलते  वह अपने पति के ऐसे गुनाह भी  माफ कर देती है जिसके लिए वह कभी कोई  समझौता नहीं करना चाहती। हैरानी होती है कि जिस मुद्दे पर घर टूट जाते हैं, रिश्ते तबाह हो जाते हैं, बच्चे अलग-थलग पड़ जाते हैं उसी मुद्दे पर
पत्नियां सार्वजनिक मंच पर डटकर मोर्चा लेती हुई नजर आती हैं। कई नाम
हैं बिल क्लिंटन की पत्नी हिलेरी क्लिंटन  से लेकर अमरमणि त्रिपाठी की
पत्नी मधुमणि तक सब अपराधी पति की  भक्ति करने में ही यकीन करती दिखाई देती हैं । उत्तर  प्रदेश के विधायक अमरमणि ने तो कवयित्रि मधुमिता की हत्या उस वक्त करा दी थी जब वे गर्भवती थीं। अमरमणि आज जेल में हैं।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन  पर 1992 के चुनाव प्रचार अभियान के दौरान अभिनेत्री से  रिपोर्टर बन गईं जेनिफर फ़्लार, ने आरोप लगाया था कि उनके बारह वर्ष के बच्चे के पिता बिल हैं तब
हिलेरी ने एक इंटरव्यू में कहा- 'मैं यहां इसलिए नहीं बैठी कि एक छोटी सी
स्त्री मेरे पति के साथ खड़ी है। मैं यहां हूं क्योंकि  मैं उनसे प्यार करती हूं और
उनका सम्मान करती हूं।"  मोनिका लुइंस्की मामले पर भी उनका यही रवैया था। एक्टर शाइनी आहूजा पर उनकी नौकरानी ने बलात्कार का आरोप लगाया था। पत्नी अनुपमा आहूजा का विश्वास नहीं डिगा। इसी कथित विश्वास और भरोसे में पूर्व जल संसाधन विकास मंत्री महिपाल मदेरणा की पत्नी लीला मदेरणा का बयान बहुत चौंकाने वाला है। वे कहती हैं- 'मैं कहूंगी टीवी देखना, अखबार पढऩा बंद करो, इनके कैमरे तोड़ दो। सीडी-वीडी और रिलेशन होना कोई अपराध नहीं। यह तो राजा-महाराजा के ज़माने से चला आ रहा  है
दरअसल,उन्होंने उसी मानसिकता को भुनाने  की कोशिश की है जो स्त्री को एक बंधे बंधाए आदर्श की फ्रेम में देखना चाहता है। वे सीडी की विश्वसनीयता को लगभग स्वीकारते हुए कहती हैं कि दोष उस स्त्री का है जो इस तरह की समझौतावादी भूमिका में है। पति परमेश्वर का कृत्य उन्हें उनका हक लगता है। नैतिक शुचिता की ओर उनका कोई ध्यान नहीं है। मंत्री पद की गरिमा से भी  उनका कोई लेना-देना नहीं। उल्टे जाट बिरादरी से अपेक्षा करते हुए लीला यहां तक कह डालती हैं कि पार्टी को यह सब बहुत भारी पड़ेगा। बिरादरी के विचार और सोच को इस
कदर मोटिवेटेड कैसे मान लिया जाता है कि कोई भी  घटना विशेष उनके विचारों को नहीं झकझोरेगी। जातिगत सोच उन्हें भेड़चाल में चलने के लिए ही मजबूर करेगी, क्या इस सोच पर विराम नहीं लगना चाहिए। बहरहाल, पूर्व से पश्चिम तक दुनिया एक है। स्त्री की सोच एक है। त्रिकोण के तीसरे
कोण का विरोध करते हुए पत्नियां अपने पति का बेहतरीन डिफेंस खड़ा
करती हैं, फिर चाहे आपसी विश्वास की धज्जियां उड़ चुकी हों। इसी विश्वास में उन्हें समाज में अपना सम्मान  सुरक्षित नजर आता है। पति के गुनाह को वे गुनाह नहीं मानतीं और तो और इतने भी  सब्र का परिचय नहीं दिया जाता कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है। कम से कम पीडि़त पक्ष को एक निष्पक्ष माहौल ही दिया जाए। बयानबाजी उसका पक्ष कमजोर करती है। पत्नी के साथ होते ही अपराधी का दुस्साहस लौट आता है। पत्नी के बयान पर सबकी निगाह रहती है। ऐसे में पत्नियां जब-तब पति का डिफेंस खड़ा कर उन्हें पर्दा  देती आई हैं। यही अवसर होता है जब स्त्री का पर्दा उठकर पुरुष को आवरण दे  देता है । वे चीख-चीख कर पूरे जोश ओ खरोश के साथ बयानबाजी करती हैं , ऐसा नहीं किया तो शायद उनके दर्जे में कमी आ जाएगी. सच भी है समाज ऐसी पत्नियों का सम्मान करता है और गलती से कोई पति अपनी पत्नी का यूं साथ दे बैठे तो वह घोर नाकारा और नपुंसक करार दे दिया जाता है.
पूरी आशंका रहती है कि वे केवल रिश्ते की महत्ता और भावनाओं के वश में आकर अपनी बात कह  रही हैं। ऐसे में उनके समर्थन या फिर विरोध दोनों ही बयानों को खारिज किया जाना चाहिए। भंवरी देवी कांड में महिपाल मदेरणा की बीवी की बातों को भी इसी प्रकाश में देखा जाना चाहिए। जोधपुर की नर्स और लोकगायिका भंवरी देवी गायब हैं। होने और न होने का कोई सबूत अब तक नहीं है। जो भी बातचीत बाहर आई है वह सत्ता  के घिनौने स्वरूप को उजागर करती है। पैसे और पावर के इस खेल के सामने आने के बाद किसी को हक नहीं पहुंचता कि वे अपने कहे से मामले की नजाकत को भंग करे। इस पूरे कांड का सच सामने आना चाहिए, बस।

Friday, November 11, 2011

जिरहबख्तर


आज फिर हमने  गुस्ताखी की है
तेरे ग़म को लफ़्ज़ों की शक्ल दी है
 
क्यों चाहा अल्फाज़ का ये जिरहबख्तर
क्या होंसलों में अब कोई कमी सी है ||

मेरे हालात पे यूं जार-जार रोने लगा वो
समझ आया खुदा ने ही नाइंसाफी की  है ||
 
ये नुमाया लफ्ज़ अब बूंदों में घुल रहे हैं
तेरी सोहबत ने ये क्या सूरत दी है ||

तेरी सोहबत को दोष क्यूं कर हो
खामोश पानी को इसी ने रवानी दी है ||
 
मेरा किया गुनाह ए कबीरा न सही
गुनाह ए सगीरा से भी अब तौबा की है||

आज फिर हमने  गुस्ताखी की है
तेरे ग़म को लफ़्ज़ों की शक्ल दी है ||

गुनाह ए कबीरा -बड़ा गुनाह
गुनाह ए सगीरा -छोटा गुनाह
जिरहबख्तर -कवच