Wednesday, July 13, 2011

मेरे करीब मेरे पास

यादों में मसरूफ़ एक सुबह















तुम्हारे आते ही भीग जाती हैं ये आंखें
इतनी शिद्दत से कोई नहीं आता मेरे पास


ये जो धरती का सिंगार देख रहे हो इन दिनों
  इतना हरापन तुम्हीं से आया है मेरे पास
 
हर मुश्किल हालात में मेरा तेरी ओर ताकना
अब कहीं से कोई जवाब नहीं आता मेरे पास

टूटते तारे का नज़र आना भी अच्छा होता है
कभी गम में शरीक होने ही आ जाओ मेरे पास


ये जो मधुर कलरव हमारे पंछियों का है
तुम हो यहीं
मेरे बेहद करीब मेरे पास

9 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

अपने प्रियजनों के पास होने का अहसास ही प्यारा है।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

जो जिस्म की हदों से गुज़र जाते हैं
वे सदा को दिल में ही रह जाते हैं

सागर said...

इस बार सब कुछ ज्यादा बेहतर है, तस्वीर, याद और रंग भी....

Kishore Choudhary said...

बहुत खूबसूरत !

रंजना said...

अतिसुन्दर प्रेमाभिव्यक्ति....

सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi said...

बहुत खूबसूरत

kavita said...

Touched my heart .Wonderful :)

varsha said...

bahut shukriya praveenji, anuraagji, sagarji,kishoreji,ranjanaji,sidharth aur kavita.

जयकृष्ण राय तुषार said...

सुंदर कविता और कल्पना बधाई और शुभकामनायें