Wednesday, July 29, 2009

जयपुर की महारानी गायत्री देवी नहीं रहीं




जयपुर की महारानी गायत्री देवी का आज जयपुर में निधन हो गया . वे ९० वर्ष की थीं .बुधवार दोपहर संतोकबा दुर्लभजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली. कूंच बिहार में जन्मीं गायत्री देवी का असली नाम आयशा था.उनका विवाह जयपुर के महाराजा मानसिंह के साथ १९४० में हुआ. वे उनकी तीसरी पत्नी थीं. उनका रहन-सहन अन्य महारानियों से अलग था .वे घुड़सवारी करतीं गौल्फ़ खेलती शिकार पर जातीं . इन सब के बावजूद गायत्री देवी से सादगी और गरीमा कभी अलग नहीं हुई .वोग पत्रिका ने उन्होंने दुनिया की सबसे खूबसूरत महिलाओं में शुमार किया. मकबूल फ़िदा हुसैन और अमिताभ बच्चन उनके प्रशंसकों में रहे हाँ इंदिराजी से ज़रूर उनका बैर रहा. वे जयपुर से तीन बार सांसद का चुनाव जीतीं लेकिन आपातकाल [१९७५] में उन्हें इंदिरा गाँधी ने तिहाड़ जेल में बंद कर दिया .
पिछले कुछ दिनों से वे अस्पताल में दाखिल थीं . सांस लेने और पेट दर्द की शिकायत के बाद वे कुछ बेहतर भी महसूस कर रहीं थी लेकिन आज जब दफ्तर में यह खबर आयी तो सबके स्वर धीमे हो गए अधिक से अधिक सामग्री देने के जूनून के साथ सब जैसे दर्द को भी जी रहे हैं. इस गरिमावान जीवन और mgd [स्कूल की बुनियाद उस समय पड़ी जब राजपूत लड़कियां परदे में रहती थी ] स्कूल के माध्यम से लड़कियों की शिक्षा की राह आसान करने वाली गायत्री देवी को श्रध्दासुमन .

Friday, July 10, 2009

बात कुफ्र की की है मैंने....


पेश है एक वार्तालाप

टॉम-उफ...क्या हो गया है देश को
डिक-क्यों क्या हुआ...
टॉम-अरे... अब ऐसे घृणित काम को भी कानूनी मान्यता मिल गई... महिला का महिला और पुरुष का पुरुष के साथ संबंध पर कोर्ट को कोई एतराज नहीं...
डिक-तो इसमें गलत क्या है
टॉम-गलत ही गलत है। ये कुदरत के खिलाफ है। सोचकर ही घिन आती है। यह फैसला शादी, परिवार जैसी व्यवस्था को खत्म कर देगा।
डिक-यह सब पर लागू नहीं होता, बल्कि जो लोग ऐसे हैं उन्हें प्रताड़ना से बचाएगा। इन्हें समझने की बजाए हम घरों में कैद कर देते हैं। पुलिस उनके साथ खराब सुलूक करती है।
टॉम-इन्हें क्या समझना...ये तो बीमार और पागल हैं।
डिक- यह न तो बीमार हैं और न असामान्य। जैसे आप किसी स्त्री को पसंद करते हैं या कोई स्त्री पुरुष को पसंद करती हैं, वैसे यह प्रवृत्ति भी जन्मजात है।
टॉम-सब बकवास है। इनका तो इलाज होना चाहिए, न कि इन्हें अधिकार दिए जाने चाहिए। इन्हें बढ़ावा क्यों दे रहे हैं?
डिक-नहीं, यह कोई छूत की बीमारी नहीं है, जो दूसरों में फैल जाएगी। इसके लिए एक जीन जिम्मेदार है।
टॉम-ऐसे गन्दे काम के लिए भी जीन जिम्मेदार हैं।
डिक-हां है, तुम उसे सिर्फ सेक्स तक ही देखते हो, वह तो सिर्फ एक छोटा-सा हिस्सा है। मूल बात है भावनात्मक लगाव, जो सामान्य तौर पर किसी भी स्त्री-पुरुष में होता है। उनकी सारी जिंदगी यहीं तक तो सीमित नहीं रहती।
टॉम-इसके लिए सड़कों पर उतरने की क्या जरूरत। जी लो जिंदगी। इमोशनल तरीके से।
डिक-जिस तरह दो प्रेमी एक-दूसरे के बिना नहीं जी पाते, वैसा ही आकर्षण ये महसूस करते हैं। यह बात एक शोध से भी सिद्ध हो चुकी है। ये केवल इतना चाहते हैं कि इन्हें भी दुनिया समझे। ये इस दुनिया में खुद को अल्पसंख्यक और असुरक्षित मानते हैं।
टॉम-मुझे तो कानून ही सही लगता है। इन्हें समाज में नहीं होना चाहिए।
डिक-क्यों... इन्होंने क्या अपराध किया है। उल्टे इन्हें समझने वाला कोई नहीं है। ये मौत से बदतर जिंदगी जीते हैं, जबकि बिलकुल सामान्य जिंदगी जी सकते हैं।
टॉम- ऐसा कोई शास्त्र नहीं कहता। सब धर्मों ने इसे वर्जित माना है।
डिक-वहां तो कई बातें वर्जित हैं। क्या उन सबका पालन हम कर पाए हैं और क्या वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर कई पुरानी धारणाएं बदली नहीं हैं।
टॉम-फिर कुछ लोग सुधर कैसे जाते हैं..
डिक-वे बदलते हैं खुद को। परिवार और समाज के दबाव के आगे। ठीक वैसे ही जैसे कोई लड़का या लड़की परिजनों की मर्जी के आगे घुटने झुका देता है, लेकिन इससे उसका झुकाव कम नहीं होता। क्षणिक आवेश में मौके का फायदा कई लोग उठाते हैं, लेकिन उनमें सड़कों पर उतरने का साहस नहीं होता ।
टॉम- आगे ये शादी का अधिकार मांगेंगे फिर बच्चे गोद लेने का।
डिक-इसमें दिक्कत क्या है, यह उनकी मर्जी पर छोड़ देना चाहिए।
टॉम-कोई मरना चाहता है। उसे भी चलाने दो मर्जी। आत्महत्या को क्यों जुर्म मान रखा है?
डिक-ये तो जिंदगी जीना चाहते हैं और वो खत्म करना। दोनों में फर्क है।
टॉम-लगता है तुम भी पागल हो गए हो, कहीं तुम भी...
डिक-मैं ऐसा तो नहीं हूं, लेकिन होता तो भी मुझे कोई शर्म नहीं आती।
टॉम-तुम सरफिरे हो। तुम्हारी पूरी सोच ही अजीब है..
डिक-या रब न वो समझे हैं, न समझेंगे मेरी बात,
दे और दिल उनको, जो न दे मुझको जुबां और।


गौरतलब है की सर्वोच्च न्यायालय ने मुद्दे को खारिज करने की बजाय धारा ३७७ के समर्थन में एन जी ओ नाज़ और सरकार को नोटिस जारी कर दिए हैं. बहस के सारें रस्ते अभी खुले हैं कि यह कुफ्र है यां कुछ और...

photo courtesy ;AP an activist in kolkata after delhi highcourt version of decriminalising homosexuality under act 377 of ipc.

Tuesday, July 7, 2009

आय लाइक करिना - वसीम अकरम




आज कुछ पुराने पन्नों से। करीब पौने तीन साल पहले [6th oct 2006] वसीम अकरम जयपुर आए थे। राजस्थान पत्रिका की सिटी मैग 141 के लिए उनसे मुलाकात करनी थी। होटल रामबाग पैलेस में वे बहुत कूल और कांफिडेंट नजर आ रहे थे । साथ ही भारत की तरक्की से प्रभावित भी। पेश है वही प्रकाशित इंटरव्यू जस का तस।

दुनिया के सबसे तेज लेफ्ट आर्म फास्ट बॉलर, गुड कमेंटेटर बट सिवियरली डायबिटिक वसीम अकरम शुक्रवार को जयपुर में थे। खेल के मैदान में जितने आक्रामक, जाती जिंदगी में उतने ही हंसमुख और मिलनसार। हर सवाल के लिए तैयार, कहीं नो कमेन्ट नहीं। क्रिकेट, पॉलिटिक्स, इंडिया, बॉलीवुड, बीमारी सबके बारे में वर्षा भम्भाणी मिर्जा की वसीम अकरम से एक्सक्लूसिव बातचीत-
कहते हैं, जिसने लाहौर नहीं देखा, वो पैदा ही नहीं हुआ। जयपुर के बारे में क्या कहेंगे?>

हां, मैं लाहौर का हूं, लेकिन जयपुर बहुत खूबसूरत है। पूरी दुनिया में रिच हेरिटेज-कल्चर के लिए जाना जाता है। जब मैचेस के लिए आते थे, तब टाइम नहीं होता था। अब देखना चाहूंगा।

आपके सामने (बातचीत रामबाग पैलेस की लॉबी में हो रही थी) एसएमएस स्टेडियम है, जहां चैंपियंस ट्राफी होने जा रही है...

मैंने देखा, बहुत शानदार तैयारी चल रही है। स्टेडियम बहुत बदल गया है। अच्छे मैचेस होंगे।
कौन जीतेगा चैंपियंस ट्राफी?

टॉप थ्री में ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका और हिन्दुस्तान-पाकिस्तान।

इंडो-पाक तीसरे पर क्यों?

होम ग्राउंड पर ज्यादा प्रेशर होता है। इसका फायदा पाकिस्तान को मिलेगा।

और वर्ल्ड कप?

वर्ल्ड कप में साउथ एशियन टीमें अच्छा खेलेंगी। विकटें हमारे हिसाब की ही होंगी।
पाक में मो. युसुफ को कप्तान...

वही सीनियर था। मैं इन दिनों बाहर हूं। ज्यादा कुछ पता नहीं। वही डीज़र्विंग था।

मीडिया कह रहा है कि युसुफ को मजहब बदलने का फायदा मिला।

यह बिलकुल गलत है। तीन दिन पहले मैंने इंटरव्यू किया (वसीम ईएसपीएन के कमेन्टेटर हैं)। उसने कहा, मैं मर्जी से मुसलमान बना। यह मीडिया का सही इंटरप्रिटेशन नहीं है।

इंडियन टीम में फेवरेट कौन है?

इरफान पठान और वीरेंद्र सहवाग।

पाकिस्तान में अब तक का बेस्ट प्लेयर?

इमरान खान इज द बेस्ट।

एज ए पॉलिटिशियन?

अभी नए हैं पॉलिटिक्स में इमरान।

आप सियासत में जाएंगे?

कह नहीं सकता। हां भी, ना भी।

मुशर्रफ कैसे प्रेसिडेंट हैं?

डेमोक्रेसी इज द बेस्ट। लेकिन मुशर्रफ बेहतर साबित हो रहे हैं।

सचिन के बारे में ?

सचिन अब बूढ़ा हो गया है।

और सौरव का जाना?

जाते सभी हैं, लेकिन जिस तरह उन्हें हटाया गया वह बहुत खराब था।

आप हिन्दी फिल्में देखते हैं?

हां, लास्ट ओमकारा´ देखी। कमाल का काम किया सैफ, अजय ने।

और करीना।

आई लाइक करीना वेरी मच। रानी मुखर्जी भी ब्लैक´ में बहुत अच्छी लगीं। एक्टर में अमिताभ बच्चन के अलावा कोई नहीं।

सिंगर्स में?

लता, आशा, सोनू निगम, नुसरत फतह अली खां व गुलाम अली। अंग्रेजी गाने नहीं सुनता।
आप ये सब कहां देख लेते हैं?

इधर आपके यहां फिल्म रिलीज होती है, उससे पहले हमारे यहां सीडी आ जाती है।

पाकिस्तान में मल्टीप्लैक्स का कोई बूम नहीं है?

नहीं, पता नहीं क्यूं। वहां मार्केट डेवलप नहीं हो पा रहा। इंडिया तो तेजी से ग्रो कर रहा है। कोई शक नहीं कि इंडिया सुपर पॉवर होगा। मैं दिल्ली, इंदौर, लखनऊ, चंडीगढ़ कई शहरों में गया हूं। इकॉनामिकली दे आर ऑल बूमिंग।

अब तो पूरे साल क्रिकेट खेली जा रही है।

यह बहुत अच्छा है। ज्यादा क्रिकेट, ज्यादा पैसा होना चाहिए। और खेलों के मुकाबले क्रिकेट में पैसा कम है।

डायबिटीज के साथ जीवन कैसा होता है?

मुझे दस साल से डायबिटीज है। खान-पान और एक्ससाइज में डिसिप्लिन बहुत जरूरी है। दिन में दो बार शुगर चेक कर लेता हूं, कोई परेशानी नहीं आती है।