शुक्रवार, 3 अप्रैल 2009

नो मोर फूल


पिछले सप्ताह जयपुर में एक युवती की कथित प्रेमी ने हत्या कर दी। नाम छिपाने में कोई तुक नहीं क्योंकि हमारी पुलिस अपराधी से पहले पीडिता की सात पुश्तों का पता ठिकाना खोज लाती है। उनतीस साल की सुमन के केस में भी यही हुआ। पुलिस ने कहा, वह लड़के की प्रेमिका थी। शराब पीती थी। दावत होटल में कमरा घंटों से बुक था। लड़के ने लड़की के सारे नाज-नखरे उठाए। यहां तक कि स्कूटर भी खरीदकर दिया। और जब लड़का सुमन के ऐशोआराम का खर्च न उठा सका तो लड़की ने मिलना-जुलना बंद कर दिया। लड़के को बुरा लग गया और उसने लड़की का गला दबाकर कत्ल कर दिया।
ताकत जीती अबला हारी। अफसोस, पुलिस की बयां की गई इस कहानी माफ कीजिए, तफ्तीश को अखबार जस का तस छाप देतें हैं . तहकीकात में आरोपी मनोज चावला के लिए हमदर्दी साफ नजर आती है। पुलिस ने तो कथित तहकीकात का ढिंढोरा सब जगह पीट दिया। सुमन कहां मौत की नींद तोड़कर सच्चाई बताने आने वाली है। लड़की का परिवार वह तो बिटिया के होटल में मिलने से ही अधमरा हो जाता है। उस पर लड़का, शराब यह तो किसी कलंक से कम नहीं। ये दोनों वयस्क थे। मिलना-जुलना आपसी सहमति के आधार पर कहीं भी हो सकता है। पार्क में, रेस्त्रां में या होटल में। यही मामला किसी रसूखदार का होता तो हमें आपको हवा भी न लगती। सवाल लड़की का था एक सामान्य लड़की का। जमकर कीचड़ उछाला गया। क्यों पुलिस हत्या को एक हत्या की तरह देखने की बजाए घटिया कहानियां सुनाने लगती है। लड़की है तो पहली पड़ताल उसके चरित्र हनन से ही शुरु होती है। उस मामले में तो उसे लड़के के पैसों से ऐश करने वाली भी बता दिया है। कोई कैसे एक हत्यारे से इतनी हमदर्दी रख सकता है। चावला कुंठित और हारा हुआ लड़का था। उसका कोई काम और व्यवसाय सफल नहीं हुआ। इसी बीच उसने विवाह भी कर लिया था .अब अगर उसके विवाह के बाद लड़की ने मिलना-जुलना बंद कर दिया हो तो पुलिस उसे महंगे तोहफे न मिल पाने की तोहमत लगा रही है।
इस घटना के बाद हरदम प्रेम की वकालत करने वाले भले मानस ने लड़कियों के बीच चिल्लाकर कहा- लड़कियों अगर किसी लड़के से मिल रही हो तो मत मिलना। कभी कोई हादसा भी हो जाएगा तो तुम्हारी चीर-फाड़ इसी तरह होगी। सच ही है लड़कियों को आंख मूंदकर विश्वास करना बंद करना होगा।। यहां आप छली भी जाएंगी और जान से भी हाथ धोना पड़ेगा। मूर्ख बनने के लिए अब और तैयार न रहें।

16 टिप्‍पणियां:

Unknown ने कहा…

सही बात है

पुलिस बजाए मामले को सुलझाने के बजाए ऐसा ही करती है

सेंटरल पार्क वाले रेखा मर्डर केस में भी पुलिस ने लडकी को यूं ही बदनाम किया।

चाहे जैसे हुई हो

हत्‍या तो हुई ही है

पुलिस को तहकीकात करनी चाहिए, बहानेबाजी नही

के सी ने कहा…

एक कहानी के कितने तरीके हो सकते हैं ? शायद हर कोई अपनी सुविधा से उसे कहना चाहता है और अपनी सुविधा के अर्थ निकलना चाहता है. आपने जरूरी बातें कही
"लड़की का परिवार वह तो बिटिया के होटल में मिलने से ही अधमरा हो जाता है। उस पर लड़का, शराब यह तो किसी कलंक से कम नहीं।"
और मानस के शब्द
"लड़कियों अगर किसी लड़के से मिल रही हो तो मत मिलना। कभी कोई हादसा भी हो जाएगा तो तुम्हारी चीर-फाड़ इसी तरह होगी।"

दिनेशराय द्विवेदी ने कहा…

पुलिस में भी तो वही पुरुष मानसिकता के लोग भरे पड़े हैं जिन के लिए स्त्री एक वस्तु मात्र है।

परमजीत सिहँ बाली ने कहा…

विचारणीय पोस्ट।

संगीता पुरी ने कहा…

ब तक पुरूषों में इस तरह की मानसिकता वाले लोग हैं ... लड़कियों को आंख मूंदकर विश्वास करना बंद करना होगा ... शत प्रतिशत सटीक बातें कही आपने।

Udan Tashtari ने कहा…

बिल्कुल सही कहा-विचारणीय पोस्ट!!

टाला मटोली से काम नहीं चलना चाहिये.

PN Subramanian ने कहा…

पुलिस का रवैय्या निंदनीय है. आजकल तो वे बिकते ही हैं.

रूपाली मिश्रा ने कहा…

इंसानों की पहचान ही मुश्किल हो गयी है आज
क्या लड़की क्या लड़का

rajkumari ने कहा…

आपने बहुत सही बात कही है, दोष सिर्फ स्त्री होने का ही नहीं है वरन अपनी बेटियों को कायरता का पाठ पढाने का भी है आज आप ये बात अपने ब्लॉग पर लिखने की हिम्मत करती हैं तो अच्छा लगता है. आप बहुत अच्छा लिखती हैं इसी तरह संवेदनशील मुद्दे उठाती रहिये.

Dileepraaj Nagpal ने कहा…

mam sahi kha aapne no more fool,,,,vaise morniyon ko fool banna band karna padega, tabhi moron ka kuch hoga...es fool ki bhawna aap samjh hi gyi hongi

cartoonist ABHISHEK ने कहा…

Ashok gahlot ji ka kahna hai...
"har galtee keemat mangtee hai..."
ab vo ladka ho ya ladkee...
polis ko dosh dene se ladke ya ladkee ke paap kam nahi ho jaate.

Harshvardhan ने कहा…

SAHI KAHA SIR AAPNE.........
aapke blog par pahli baar aana hua ... achcha laga

mukti ने कहा…

मैं आपकी बात से सहमत हूँ हमारे समाज की ही मानसिकता ऐसी है कि प्रेम-प्रसंग में अगर कोई अपराध सामने आता है तो लड़की के चरित्र को लेकर चटखारे लिए जाते हैं और पुलिस भी लड़के का साथ देती है .

Ashok Kumar pandey ने कहा…

समाज में जो स्त्रीविरोधी नजरिया हावी है उसमे उसका चरित्र पहला निशाना होता है.क्या लड़की का शराब पीना उसकी हत्या को जस्टिफाई कर देता है?

varsha ने कहा…

rajeevji,kishoreji, dwivedi sahab, paramjeetji, sangitaji, sameerji, subramanianji, rupaliji, rajkumariji, deepu, abhishekji harshji, ashokji aap sab ka aseem abhar.

बेनामी ने कहा…

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