Thursday, March 26, 2009

ए टु `जेड `


सच कहूं तो ब्रिटिशde जेड गुडी पर लिखने का कोई इरादा नहीं था। आक्रामक अंदाज, बेतरतीब रहन-सहन, आधे-अधूरे कपड़ों ने उन्हें सेलिब्रिटी जरूर बना दिया था लेकिन सम्मान कहीं गायब था। सत्ताईस की जिंदगी और इतनी .सनसनी डेंटल नर्स का पेशा प्रेम , दो बच्चे , चर्चित सेलेब्रिटी ,फिर प्रेम कैंसर शादी और फिर एक महीने बाद सब कुछ ख़त्म लेकिन एक साल में जेड की जिंदगी में जो कुछ भी हुआ उन्होंने जिस तरह उसे लिया वह जेड के बेहद साहसी और समझदार महिला होने की ओर इशारा करता है। पिछले साल भारतीय रिएलिटी शो बिग बॉस में काम करते हुए जेड को पता चला कि उन्हें sarvical कैंसर है और वे ज्यादा दिनों तक नहीं जी पाएंगी। फितरतन इनसान हर काम को तरीके से ही करना चाहता है लेकिन जिंदगी की रफ्तार उसे भटका देती है। अन्यथा क्यों मरने से एक माह पहले जेड गुडी अपने प्रेमी से शादी करती। उस समाज में जहां बिना शादी के संबंध और फिर बच्चे पैदा कर दिए जाते हैं। जेड ने न केवल शादी की बल्कि उसके विडियो राइट्स भी बेचे ताकि उसके बाद बच्चों को कोई तकलीफ नहीं हो। यहां तक कि जेड ने अपनी मृत्यु को दिखाने के अधिकार भी बेच दिए। कैंसर की पीड़ा में गुजारे अंतिम दिनों की अनुभूतियों को किताब की शक्ल में लाने का कारण भी पैसा रहा जो कि एशोआराम के लिए नहीं बल्कि उसके दो बेटों के लिए था। मृत्यु की कगार पर इतना चौकन्ना रह पाना, आम इनसान के बूते की बात नहीं है। हर पल दस्तक देती मौत के बीच जेड एक बेहद बहादुर और जिंदा स्त्री साबित हुई हैं।मृत्यु जिंदगी का सच है लेकिन कैसा लगता होगा जब आपको पता हो कि आप मरने वाले हैं। ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म आनंद का पात्र याद आ जाता है। बाहर जिंदगी की रोशनी तो भीतर गहरा सन्नाटा, दर्द, तकलीफ। आनंद जहां जाता वहां जिंदगी नृत्य करने लगती। जबकि वह हमेशा के लिए शांत होने जा रहा था। ऐसे लोग क्या मरकर भी मरते हैं? उनके आनंद की अनुगूंज क्या बार-बार लौटकर हमारी तरफ नहीं आती? जिंदगी से भरे शब्द सदा प्रेरित नहीं करते? खैर मुद्दे की बात यह है कि क्या किसी मरीज को बता दिया जाना चाहिए कि वह मरने वाला है। इस रहस्य से परदा उठ जाना चाहिए। यदि हमें पता चल जाए कि अगले क्षण और उसके बाद यह-यह होने वाला है तो सब कुछ नीरस, ऊबाऊ और बोçझल नही हो जाएगा? ... और, मृत्यु वही तो सबसे बड़ा रहस्य है। हमारे यहां मरीज को न बताने की परंपरा है। हम मौत को अशुभ मानते हैं और उसे जाहिर नहीं करते। हमें लगता है कि यदि मरीज को बता दिया तो वह वक्त से पहले ही मर जाएगा। जेड गुडी को पता था कि वह मरने वाली है। जो काम उन्होंने किए उससे तो लगता है कि वह जिंदगी को बड़ी कर गई। गंभीर मरीजों की चिकित्सा करने वालों की राय भी यही होती है कि मरीज को हकीकत पता होनी चाहिए ताकि वह अपनी जिममेदारियों को निभा सकें और खुलकर जी सके। जिंदगी को मनमुताबिक आकार दे सके। ऐसा ज्यादातर डॉक्टर्स मानते हैं। बहरहाल, असहमत होने की पूरी गुंजाइश है। जेड को अगर पता नहीं होता तो क्या वह इतना कुछ कर पाती। शायद उसने इस सुकून के साथ दुनिया छोड़ी होगी कि वह जो जो कर सकती थी उसने किया। वह चाहती थी कि दुनिया उसे एक चहचहाती हुई चिड़िया की तरह याद रखे। वाकई जेड की ख्वाहिश पूरी होती हुई लगती है।

7 comments:

कुश said...

badhiya lekh likha hai aapne.. puri imaandari ke sath..


sabse neeche jo photo hai 'suraj chaand ek sath' wo mujhe jaipur ke jawahar kala kendra ki lag rahi hai.. kya main sahi hu?

varsha said...

शुक्रिया .
जी आप बिलकुल सही हैं .

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बहुत सही लिखा है आपने ..सहमत है आपकी लिखी बातों से

P.N. Subramanian said...

मरने की तय्यारी कैसे की जाए यह जेड गुडी से सीखना चाहिए.

चण्डीदत्त शुक्ल said...

बाहर जिंदगी की रोशनी तो भीतर गहरा सन्नाटा...सुंदर लिखती हैं आप...जयपुर का ग़ुलाबी रंग और जीवन की हरियाली...संवेदनाओं की कसमसाहट और हर किस्म के अहसास...सबका संगम...बधाई और मेरे ब्लॉग चौराहा1.ब्लॉगस्पॉट.कॉम पर आने के लिए भी आभार. गति बनाए रखें और सोच में जीवंतता भी.

Dileepraaj Nagpal said...

Zed Ki Life M A 2 Z Bhale hi Good Na Ho per Jaate-Jaate Wo Gudi Is Good Ki chaap Chod Hi Gyi. Hosle Aur Zazbe Ko Salaam...

varsha said...

ranjuji ,subramanianji,shuklji aur dlilip aapka shukriya aur abhar.