Thursday, January 15, 2009

उफ ये जुनून ए पतंगबाजी


                                                                    tasveer abhishek tiwari

















नजारे जयपुर कि पतंगबाजी के

मै जन्म से जयपुरी नहीं हूँ .होती तो बेहतर था यूँ मेरा शहर इंदौर भी कम उत्सवप्रिय नही लेकिन जयपुर की बात ही निराली है । यूँ तो पिछले बारह वर्षों से इस शहर की जिंदादिली को जी रही हूँ लेकिन मकर संक्रांति बेहद खास है। सारा शहर पतंगबाजी के इस कुम्भ मै डुबकी लगाता है मानो कोई रह  गया तो बड़े पुण्य से वंचित रह जाएगा. क्या छोटा क्या बड़ा, क्या पुरूष क्या स्त्री सब पतंग और डोर के रिश्ते मै बंधने को आतुर. सारा शहर तेज़ संगीत कि धुनों के साथ छत पर होता है वाकई जिसने जयपुर की पतंगबाज़ी नहीं देखी वह जन्मा ही नहीं । इस बार नज़ारा कुछ खास रहा क्योंकि शाम ढलते ढलते आकाश में पतंगों के साथ आतिशी नजारे भी हावी थे । जयपुर पर रश्क़ किया जा सकता है क्योंकि त्यौहार वही है जो हर एक के दिल मै उत्साह जगाये खुशी को एक सूत्र मै बाँध दे। यह यहाँ पर खरा है यकीन नहीं होता तो डेली न्यूज़ के photojournlist दिलीप सिंह कि नज़रों से देखिये.

15 comments:

नीरज गोस्वामी said...

उफ़ आपने घर की याद ताजा कर दी...पतंग बाजी में सही में जयपुर का कोई जवाब नहीं....याद आता है कैसे हम लोग सुबह पाँच बजे घर की छत पर लाउड स्पीकर लगा कर वो काटा वो काटा का शोर मचाया करते थे...बाद में बच्चे भी इस शौक का शिकार हो गए और सुबह सुबह ठण्ड की परवाह किए बिना पतंग लेकर छत पर जो चढते थे तो शाम ढले बहुत मुश्किल से नीचे उतरा करते थे...हमारा घर क्यूंकि बहुत बड़ा था सो इतनी पतंगे कट कर आती थीं की क्या कहें...अभी भी आलम वो ही है...बहुत ही अच्छे चित्र लगाये हैं आपने...मजा आ गया सच में...
नीरज

Manish Kumar said...

बहुत सुंदर हमने यहाँ बैठे बैठे ये नज़ारा देख लिया आपकी वजह से..

Udan Tashtari said...

जबलपुर में तो इत्ती भीड़ नहीं होती फिर भी कुछ पतंगे तो उड़ती ही हैं मकर संक्रांति को.

Amit said...

bahut acchi photographs hain...bachpan ki yaadein taazaa ho gayi...

Kishore Choudhary said...

आपने अच्छा लिखा है जयपुर के इस अनूठे पर्व के बारे में।

PN Subramanian said...

जयपुर की तो बात ही निराली है. इस पतंगबाजी में कई दुर्घटनाएं भी हो जाती हैं. सुंदर चित्रों सहित आपके पोस्ट के लिए आभार.

cartoonist ABHISHEK said...

"पतंग हौंसला देती है
ख़िलाफ़ हवा में तन कर, इठलाकर, ठुमुक कर जीने का.
और इस कोशिश में शहीद भी हो जायें तो गम न करने का...
पतंग हौंसला देती है........"

varsha said...

shri neerajji,manishji, sameerji, amitji ,kishorji subramanianji aur abhishekji aapka shukriya. halanki blog par tasveeren prakashit karna kafi dherya ka kam hai.

सिद्धार्थ जोशी said...

जैसा जयपुर में मकर संक्रांति में होता है वैसा ही कुछ बीकानेर में आखातीज पर होता है। मैंने कभी जयपुर की पतंगबाजी नहीं देखी है लेकिन जो एक बार बीकानेर की आखातीज की पतंगबाजी देख ले वह किसी और स्‍थान से इसकी तुलना नहीं कर सकता। हमारे शहर की सड़कें सूनी हो जाती है, महिलाएं और बच्‍चों समेत सभी लोग छतों पर। आपने जो खूबसूरत फोटो दिखाए हैं उनमें कुछ लोग सड़कों पर भी नजर आ रहे हैं। मैं आपको न्‍यौता देता हूं बीकानेर की पतंगबाजी देखने का। न सड़कों पर कुछ न बाजार में न ही घरों के अन्‍दर जो होता है सबकुछ छतों पर ही होता है।

वैसे यह तुलना की नहीं भावना की बात है। हम लोग एक दिन के लिए पूरे पागल हो जाते हैं। आठ से साठ या नब्‍बे तक के कह सकते हैं सभी...

अशोक कुमार पाण्डेय said...

वर्षा जी जयपुर का सुन्दर द्श्य दिखाने का शुक्रिया। वैसे अहमदाबाद में रहते हुए दीप और पतन्ग का जो अद्भुत द्श्य मैने देखा है वो भी कम मनोहारी नही।
हर शहर की अपनी खूबसूरती और रंगीनी है जब तक कोई मोदी उसे एक ही रंग से रंग कर बदरग नहीं कर देता।

शिवराज गूजर. said...

patangbaji hi nahi jaipur ke log har utsav isi utsah se manate hain. bahut achha laga ki jaipur ka yah andaj bhi aapko pasand aaya. vaqt mile to mere blog (meridayari.blogsopt.com)par bhi visit karen.

प्रदीप कांत said...

फोटो बहुत अच्छे हैं।

डॉ.मीनाक्षी स्वामी said...

सुंदर नजारे की सुंदर तसवीरें।

kavita said...

Beautiful ! Very well captured !Share karne ke liye dhanyavaad Varsha :)

Anonymous said...

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