Wednesday, September 10, 2008

गाली , मसाज का बॉडी बॉस

सबसे पहले एक कन्फैशन कि तथाकथित फैमिली शो बिग बॉस रोज देखती हूं और मौजूद महिलाओं को निर्वस्त्र करने या होने के उतावलेपन को देख वितृष्णा से भर उठती हूं। शो में स्त्री मानसिक नग्नता की भी शिकार है। या तो बेवजह छोटे-छोटे कपड़े पहन रही है या किसी लड़के से लिपट रही है या फिर लगाई-बुझाई करते हुए रसोई में खाना पका रही है। ये लड़कियां फुटेज के लिए किसी भी हद तक गिर रहीं हैं। एक ही लक्ष्य है कि बिग बॉस के घर में रहते हुए ज्यादा से ज्यादा निर्माता, निर्देशक उनकी त्वचा के दर्शन कर लें और यहां से निकलते ही ऑफर्स के अंबार से उनकी झोली भर जाए।
दरअसल बिग बॉस को एक फॅमिली शो बताया जा रहा है। इसमें सेलेब्रिटीज (जिनके खाते में विवाद के अलावा कुछ दर्ज नहीं ) को एक घर में बंद कर दिया जाता है। तीन महीनों के लिए बाहर की दुनिया से कटकर ये अपना खाना-पीना लड़ना-झगड़ना, मोहब्बत-नफरत जारी रखते हैं। घरवाले सदस्यों को एक-एक करके बाहर निकालने की साजिश रचते हैं और बाहर वाली जनता उन्हें एसएमएस कर बचाने की कोशिश करती हैं। कनसेप्ट और कमाई के लेवल पर शो नंबर वन है। शो में शामिल आइटम डांसर संभावना सेठ, अबू सलेम की पूर्व प्रेमिका मोनिका बेदी, अंगों को संवारने में व्यस्त अभिनेत्री पायल रोहतगी , विचित्र व्यवहार वाली राखी विजन, रोतली अलीना वडीवाला और टीवी एक्ट्रेस केतकी दवे शामिल हैं। उम्रदराज केतकी को छोड़ दिया जाए तो बाकी सब की सब विक्षिप्तों की तरह व्यवहार करती हुई नजर आती हैं। एकदम अपरिपक्व और असंयत। शो में मौजूद लड़के उन्हें भूतनी, कम कपड़े पहनने वाली, कपड़े संभाल वरना... हो जाएगी जैसी उपाधियों से नवाजते रहते हैं, लेकिन इन्हें केवल एक ही भूख है यहां से निकलते ही काम मिल जाने की भूख। एक भी संवाद ऐसा नहीं है जो इन महिलाओं के सकारात्मक सरोकारों को दिखाता हो। शो से समझ आता है कि छोटे परदे के छोटे कलाकारों की दुनिया कितनी छोटी है और काम पाने के लिए उन्हें दिमाग को कितने ताक पर रखना पड़ता है। जो भी है बस शरीर है। शो के एक हिस्से में इन लड़कियों को स्कूल यूनिफॉर्म पहननी होती है लेकिन ग्लैमर की मारी ये लड़कियां पचास मिनट के शो में पांच मिनट भी पूरे कपड़ों में नहीं दिखना चाहती। समझ से परे है कि ये लड़कियां खुद ऐसी बनी या पैसों ने बनाया। क्या वाकई दर्शकों को स्त्रियों को इतनी बेवकूफ और कम-तंग कपड़ों में देखने में ही मजा आता है? ये लड़कियां लड़कों के भड़काने पर आपस में ही लड़ पड़ती हैं। पूरे मेकअप के साथ बिकिनी पहन पूल में कूद जाती हैं। वाह रे शो बिजनेस का रिअलिटी शो। काम की लॉलिपॉप क्या- क्या करा रही है। गाली से लेकर मसाज तक।
गौर करने लायक बात है कि लड़के यहां काफी शांत सहज हैं। अपनी बीवी को पीटने के आरोपी राजा चौधरी और राहुल महाजन भी अपना संतुलन नहीं खोते हैं। सारे लड़के आपे में नजर आते हैं और लड़कियां आपा खोती हुई। यह तकलीफदेय है और इशारा करता है कि इनका प्रोफेशन इन्हें किस कदर दबाव में रखता है। सुंदर दिखने का दबाव । यह संकेत भी है स्त्री के प्रति इंडस्ट्री के नजरिए का। अच्छा हुआ कि स्किन बिजनेस के मारे इस शो से ब्रिटिश टीवी एक्ट्रेस जेड गुडी चली गईं। कब तक बेसिरपैर की बातें करते हुए वक्त गुजारतीं। बहरहाल, स्त्रियों की कुटिल और कामुक छवि पेश करने वाले शो को देखने का अपराध हम सब करतें हैं। क्यों एक बार भी खयाल नहीं आता कि हिंदुस्तान के कौनसे परिवार की किस स्त्री की बानगी है यह?

12 comments:

Hari Joshi said...

कठपुतली चाहेगी भी तो क्या? नाचना तो उसे वैसे ही पड़ेगा जैसा उनकी डोर थामने वाला चाहेगा। दरअसल ग्लैमर की चकाचौंध ने इन जीती-जागती सुंदरियों को कठपुतली बना दिया है।

रंजन said...

देखो और आनन्द आये तो लो.. नहीं तो भुल जाओ... ज्यादा सोचना नहीं.. मैं तो रोज देखता हुँ.. SMS आज तक नहीं किया न कभी करुंगा...

डॉ .अनुराग said...

अभी ओर नौटंकी बाकी है हजूर .देखते रहो.....

Udan Tashtari said...

हम उस वक्त टी वी बन्द कर ब्लॉग देखते

Arun Aditya said...

बिग बॉस न देखतीं तो इस नग्नता पर इतना अच्छा कैसे लिखतीं। लेखक-पत्रकार को हर जगह निगाह रखनी चाहिए। देखते रहो, लिखते रहो।

dhirendra pratap singh durgvanshi said...

varsha ji ye bigboss nahi balki narrow mentality ka udaharan hai-khair aap ne is pr likha achha laga-tv walo ka ye prayas is mayne achha kaha ja sakta hai ki ye log aaise show dikha kar bade logo ki chhoti mansikta ka pradarshan kar rahe hai-thanks for big thinking---dhirendra singh

cartoonist ABHISHEK said...

गन्दा है पर 'धंधा' है ये...........!!!

Lovely kumari said...

समीर जी से सहमत हूँ ..क्या आलतू फालतू देखने में समय बर्बाद करना ..

varsha said...

टिप्पणिया टोनिक हैं . शुक्रिया . माफ़ी चाहतीं हूँ तीन टिप्पणियों को छोड़ इसे मेरे प्रोग्राम देखने से जोड़ दिया गया . शायद मैं ही मुद्दे की बात कह नहीं पायी या यह मुद्दा हे ही नहीं कि रियलिटी शो हो या धारावाहिक या मेंन स्ट्रीम सिनेमा औरत की त्वचा तक सिमटा दिया jata हे इसके पार कोई चुनौती, कोई संघर्ष मायने नहीं रखता . ऐसा सोचना ही ओल्ड फैशन होना हे . कितना भी गन्दा क्यों न हो धंधा होना चाहिए बस. सविनय .

dhirendra pratap singh durgvanshi said...

versha ji aap ko dukhi hone ki jarurat nahi hai.agar aaj nari ko aise dikhaya jata hai to uska bhi karan nari hi hai jo purusho ke hath ki kathputli bani nachane ke liye hr samay taiyaar rahti hai.kya kahegi ap rakhi sawant aur mallika sehrawat ko jinhone maryada ki her seema ko todne ki kasam kha li hai.khair ye shabdo ke bhramjaal se hame bachna chahiye--savinay apka dhirendra

राजीव जैन Rajeev Jain said...

पहले तो आपकी साफगोई को सलाम
सच है रियलिटी शो के नाम पर स्क्रिप्टेड और वैल प्लान्ड, कुछ भी दिखाने को तैयार रहते हैं ये टीवी वाले! हम तो कलर्स न आने की वजह से शो नहीं देख पाते, जितना देखा उतना आजतक पर देखा। शो में आई हुई लड़कियां एक बार आ गई हैं तो नाम कमाकर ही लौटेंगी वाली तर्ज पर सबकुछ पा लेना चाहती हैं?

अमित पुरोहित said...

वर्षा जी।
बेशक 'टि‍प्‍पणी टॉनि‍क है', लेकि‍न इस 'टॉनि‍क' का सेवन अपने मर्ज के मद्देनजर ही कीजि‍ए, यूं ही 'टि‍पि‍याने' को 'टॉनि‍क' समझने की भूल तो हर्गिज न करें। आज पहली बार आपके ब्‍लॉग पर आया और राजीव के कहे को अपना कहा पाया। एक सलाम अपना भी.... यही ‘तेवर’ बने रहे, ‘खम्‍मा धणी।’

अल्‍लाह करे ज़ोरे कलम और भी ज़ि‍यादा।